
General Dhiraj Seth: भारतीय सेना के सर्वोच्च नेतृत्व में मंगलवार को बड़ा बदलाव हुआ। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय थल सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण किया, जबकि दो वर्षों तक सेना का नेतृत्व करने वाले जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त हो गए। इस बदलाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि निवर्तमान और नए, दोनों सेना प्रमुखों का छत्तीसगढ़ से विशेष जुड़ाव रहा है।
जहां जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने बचपन की पढ़ाई छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में की, वहीं नए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल के.एम. सेठ के पुत्र हैं। इस कारण सेना प्रमुख पद का यह बदलाव प्रदेश के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
30 जून 2024 को सेना प्रमुख बने जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 30 जून 2026 को अपना कार्यकाल पूरा किया। बहुत कम लोगों को यह जानकारी है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में हुई थी। उस समय उनके पिता सरगुजा जिले में खनिज अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। इसी दौरान जनरल द्विवेदी ने वर्ष 1972-73 में अंबिकापुर के देवीगंज स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में पांचवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की।
इसके बाद उनका चयन मध्यप्रदेश के रीवा स्थित सैनिक स्कूल में हुआ, जहां से उनके सैन्य जीवन की मजबूत नींव पड़ी। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर सेना में शानदार करियर बनाया। विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य दायित्व निभाने के बाद वे भारतीय सेना के प्रमुख बने और अपने कार्यकाल के दौरान सेना के आधुनिकीकरण, सीमाई सुरक्षा और परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाल लिया। उनका छत्तीसगढ़ से गहरा संबंध है क्योंकि उनके पिता के.एम. सेठ राज्य के राज्यपाल रह चुके हैं। राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान जनरल धीरज सेठ का छत्तीसगढ़ आना-जाना लगा रहता था और प्रदेश से उनका विशेष जुड़ाव रहा है।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र जनरल धीरज सेठ को दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर (Armoured Corps) में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने लगभग चार दशक तक भारतीय सेना में विभिन्न जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
जनरल धीरज सेठ को सैन्य अभियानों के संचालन और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में बख्तरबंद रेजिमेंट, पश्चिमी सीमा पर बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन 'सुदर्शन चक्र कोर' की कमान संभाली। इसके अलावा दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण सैन्य आयोजनों तथा परिचालन जिम्मेदारियों का सफल नेतृत्व किया।
सेना कमांडर के रूप में जनरल धीरज सेठ ने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान की जिम्मेदारी संभाली। ढाई वर्षों से अधिक समय तक उन्होंने विभिन्न रणनीतिक मोर्चों पर नेतृत्व करते हुए परिचालन तैयारियों को मजबूत किया। उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना, बल प्रबंधन और क्षमता विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, भविष्य की सैन्य रणनीति और दीर्घकालिक क्षमता निर्माण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।
जनरल धीरज सेठ को एक उत्कृष्ट सैन्य रणनीतिकार और पेशेवर अधिकारी माना जाता है। उन्होंने उच्च कमान पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स में भी भाग लेकर अंतरराष्ट्रीय सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया। उनके लंबे अनुभव, रणनीतिक सोच और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें भारतीय सेना की कमान सौंपी गई है।
भारतीय सेना के नेतृत्व में यह बदलाव छत्तीसगढ़ के लिए भी विशेष महत्व रखता है। एक ओर अंबिकापुर से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले जनरल उपेंद्र द्विवेदी सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए, वहीं दूसरी ओर राज्य के पूर्व राज्यपाल के पुत्र जनरल धीरज सेठ ने देश की सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी संभाली। इस अनोखे संयोग ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।