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2026-27 से बदलेगा CBSE के नए नियम! छत्तीसगढ़ के भी हजारों छात्रों को मिली राहत, नई गाइडलाइन जारी

CBSE Language Rule Change: CBSE ने त्रि-भाषा नीति को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। मौजूदा 10वीं के छात्रों पर नए नियम लागू नहीं होंगे और उन्हें तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं देनी होगी। नई व्यवस्था 2026-27 सत्र से नए बैच पर लागू होगी।
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CBSE Free Online Courses: CBSE का बड़ा ऐलान(photo-patrika)

CBSE New Guidelines 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने त्रि-भाषा नीति को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। बोर्ड के इस फैसले से मौजूदा 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को राहत मिली है। CBSE ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 10वीं के छात्रों पर नई भाषा नीति लागू नहीं होगी। उन्हें तीसरी भाषा पढ़ने या उससे जुड़ी बोर्ड परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। नई व्यवस्था का असर अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होने वाले नए बैच के विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

CBSE Three Language Policy: 9वीं के मौजूदा छात्रों को भी एक बार की छूट

सीबीएसई ने वर्तमान 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए भी संक्रमणकालीन व्यवस्था लागू की है। इस बैच के छात्र तीन भाषाओं का अध्ययन तो करेंगे, लेकिन उन्हें दो विदेशी भाषाएं और एक भारतीय भाषा चुनने की अनुमति होगी। यह व्यवस्था केवल मौजूदा बैच के लिए एक बार के विशेष प्रावधान के रूप में लागू की गई है।

2026-27 सत्र से लागू होंगी नई गाइडलाइन

CBSE के अनुसार त्रि-भाषा नीति से जुड़े संशोधित नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे। इसके बाद कक्षा 9वीं में नए प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को नई भाषा व्यवस्था के तहत पढ़ाई करनी होगी। छात्रों को निर्धारित भाषा नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य भाषा शिक्षा को अधिक व्यवस्थित और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप बनाना है।

2028 में होगी नई व्यवस्था के तहत पहली बोर्ड परीक्षा

CBSE ने बताया कि नई दो-स्तरीय बोर्ड परीक्षा प्रणाली (स्टैंडर्ड और एडवांस्ड) के साथ त्रि-भाषा नीति का पूरी तरह क्रियान्वयन वर्ष 2028 की 10वीं बोर्ड परीक्षा से होगा। यह व्यवस्था उन विद्यार्थियों पर लागू होगी, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 9वीं में प्रवेश लेंगे। नई प्रणाली के तहत छात्रों की परीक्षा और भाषा चयन की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा।

विदेशी भाषा चुनने के लिए भी तय किए गए नियम

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में विदेशी भाषा का विकल्प तभी मिलेगा, जब विद्यार्थी कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर चुके हों। ऐसे में विदेशी भाषा को तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुना जा सकेगा। इन संशोधित दिशा-निर्देशों का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप भाषा शिक्षा को संतुलित और व्यवस्थित बनाना है।