Raipur News: रायपुर में वर्टिकल गार्डनिंग और रूफ टॉप गार्डनिंग का ट्रेंड तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है। खासकर शहरी जीवन की भागदौड़ में ‘बैक टू नेचर’ की ओर लौटने की यह कोशिश न सिर्फ जीवनशैली को सुंदर बना रही है।
Raipur News: राजधानी की ऊंची इमारतें अब सिर्फ कंक्रीट के ढांचे नहीं रहीं, बल्कि हरियाली से ढंकी ऐसी जगहें बनती जा रही हैं, जहां शांति, सुंदरता और प्रकृति का समन्वय देखने को मिल रहा है। रायपुर में वर्टिकल गार्डनिंग और रूफ टॉप गार्डनिंग का ट्रेंड तेजी से लोगों को आकर्षित कर रहा है। खासकर शहरी जीवन की भागदौड़ में ‘बैक टू नेचर’ की ओर लौटने की यह कोशिश न सिर्फ जीवनशैली को सुंदर बना रही है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित हो रही है। बैक टू नेचर संस्था के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी का कहना है, जैसे-जैसे शहर बढ़ रहा है, गार्डनिंग को लेकर लोगों में अवेयरनेस भी बढ़ रही है।
अब लोग यह समझने लगे हैं कि हरियाली जरूरी है। चाहे वो बालकनी हो या छत। रुफ टॉप और वर्टिकल गार्डनिंग की तकनीक से कम जगह में भी ग्रीन स्पेस बनाना संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि अब सिर्फ घरों में ही नहीं, बल्कि कॉमर्शियल नर्सरी की संख्या भी बढ़ रही है और लोग इसमें बिजनेस के मौके भी देख रहे हैं।
ट्रेंड के साथ जरूरत भी
इंटीरियर डिजाइनर श्वेता भी इस बदलाव पर कहती हैं, रायपुर जैसे शहर में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण के बीच गार्डनिंग न सिर्फ एक ट्रेंड है, बल्कि जरूरत बन चुकी है। यह न सिर्फ घर को खूबसूरत बनाता है बल्कि स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन के लिए भी फायदेमंद है। रायपुर के कई अपार्टमेंट्स और कॉरपोरेट बिल्डिंग्स में अब ग्रीन वॉल्स, हर्ब गार्डन, और छतों पर सब्जियों की क्यारियां दिखाई देने लगी हैं। वे बताती हैं, वर्टिकल गार्डनिंग यानी दीवारों या बाल्कनियों पर ऊपर की ओर बढ़ते पौधे जो न सिर्फ जगह की बचत करते हैं, बल्कि इमारत को नेचुरल लुक भी देते हैं। वहीं, रूफ टॉप गार्डनिंग यानी छत पर हरियाली का संसार , सब्जियां, फूल, मेडिसिनल प्लांट्स से लेकर छोटे पेड़ों तक की खेती अब छतों पर हो रही है।
वर्टिकल गार्डनिंग के फायदे
जगह की बचत
इमारत की सुंदरता बढ़ाना
गर्मी में इमारत को ठंडा बनाए रखना
ऑक्सीजन स्तर बेहतर करना
शोर व प्रदूषण को कम करना
शंकर नगर एक्सप्रेस- वे स्थित बिल्डिंग।
वन विभाग कॉलोनी पंडरी।