रायपुर

नया रायपुर में आवास- रोजगार दोनों की हालत खस्ता, 1500 करोड़ की लागत पर लग रही धूल

नया रायपुर (अटलनगर) में आवासीय और व्यवसायिक उपयोग के लिए 1500 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर धूल खा रहा है।

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Aug 23, 2018
नया रायपुर में आवास- रोजगार दोनों की हालत खस्ता, 1500 करोड़ की लागत पर लग रही धूल

रायपुर . नया रायपुर (अटलनगर) में आवासीय और व्यवसायिक उपयोग के लिए 1500 करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर धूल खा रहा है। इसमें हाउसिंग बोर्ड द्वारा बनाए गए 6000 से अधिक मकान और फ्लैट शामिल है, वहीं नया रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए गए सेंट्रल बिजनेस ड़िस्ट्रिक्ट (सीबीडी) में 500 करोड़ से अधिक का निवेश है।

सीबीडी और अन्य कामर्शियल सेक्टर में एनआरडीए ने 1 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सीबीडी में ऑफिस कॉम्पलेक्स आदि की बिक्री नहीं होने की वजह से 1 हजार से लोगों को भी रोजगार नहीं मिल मिल पा रहा है। नया रायपुर में आवास और रोजगार दोनों की बुरी हालत है। अब करोड़ों रुपए निवेश के बाद रिजल्ट नहीं मिलने के मामले में छग हाउसिंग बोर्ड और एनआरडीए दोनों ने लाचारी दिखाई है। ऐसे खर्चें पर वित्त विभाग ने भी सवाल उठाए थे।

नया रायपुर में अरबों के इंफ्रास्ट्रक्चर की देख-रेख भी नहीं है। मेंटेनेंस के मामले में एनआरडीए और हाउसिंग बोर्ड के बीच वाद-विवाद भी हो चुका है। वर्तमान में नया रायपुर के आवासीय सेक्टर में छज्जा गिरने के मामले में हाउसिंग बोर्ड के गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर कई सवाल उठे थे।

जवाब- निवेश आ रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर बना है। आने वाले दिनों में अच्छा रिजल्ट आएगा।

जवाब- निश्चित रूप से सभी को एक साथ जाना चाहिए।

800 करोड़ का गोल्फ कोर्स : एक तरफ जहां एनआरडीए अपने निर्माण का लागत वसूल नहीं कर पा रहा है, वहीं 138 एकड़ क्षेत्रफल में लगभग 160 करोड़ रुपए की लागत से गोल्फ कोर्स का निर्माण किया जा रहा है। जमीन की कीमत मिलाकर यह राशि 850 करोड़ रुपए है। इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है।

व्यवसायिक- मिश्रित- आमोद-प्रमोद- 19

यहां मिलना था रोजगार- आईटी, बीपीओ, ट्रासपोर्टिंग, रिटेल, एफडीआई, होलसेल बिजनेस, मैन्युफेक्चरिंग।

नया रायपुर में रहने वाले लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई है, जो लोग यहां निवास कर रहे हैं, वहां ना तो साफ-सफाई है और ना ही हाउसिंग बोर्ड ने अपनी जिम्मेदारी दिखाई। यहां सेक्टर-27 और सेक्टर- 29 के रहवासियों ने बताय कि एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक एनआरडीए और हाउसिंग बोर्ड ने सुविधाएं नहीं दी है। सडक़ें और बिजली चकाचक है, लेकिन कॉलोनियों के भीतर गंदगी का आलम है।

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Published on:
23 Aug 2018 09:17 am
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