रायपुर

सिर पर छत देने का वादा कर पलटी गवर्नमेंट, नही मिल रही पीएम आवास योजना की सब्सिडी

योजना का लाभ लेने बैंक लोन जरूरी, आवेदक लगा रहे चक्कर    

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May 13, 2018
PM Awas yojana
सिर पर छत देने का वादा कर पलटी गवर्नमेंट, नही मिल रही पीएम आवास योजना की सब्सिडी

रायपुर . 2022 तक सबके लिए आवास योजना में मकानों की सब्सिडी का रोड़ा ग्राहकों के लिए मुसीबत बनकर सामने आया है, क्योंकि राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से लोन लेने वाले कई ऐसे ग्राहक है, जिनके खाते में एक से दो साल बीतने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाया है।

[typography_font:14pt;" >आवास योजना के अंतर्गत सब्सिडी को लेकर सरकारी विभागों ने अलग-अलग योजना बना रखी है। मकानों की सब्सिडी के लिए बैंकों से लोन लेना जरूरी है, वहीं इससे पहले व्यक्ति के नाम से पहले रजिस्टर्ड मकान नहीं होना चाहिए। राजधानी में रायपुर विकास प्राधिकरण, छग हाउसिंग बोर्ड सहित छोटे-बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में कई ऐसे ग्राहक है, जो कि सब्सिडी के लिए बैंकों द्वारा आवेदन करने के बाद चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें ना तो विभाग में सही जानकारी मिल पा रही है और ना ही बैंकों में।

नियमों के मुताबिक अलग-अलग वर्गों के मुताबिक अधिकतम 15 और 18 लाख वार्षिक आय वाले ही आवास योजना के अंतर्गत सब्सिडी का लाभ ले पाएंगे। इससे अधिक आय होने पर सब्सिडी का लाभ नही मिल पाएगा।

आवास योजना का यह सब्सिडी, हुडको, नेशनल हाउसिंग बोर्ड और सूड़ा के माध्यम से वितरित किया जाता है, वहीं बैंक में ग्राहक द्वारा लोन लेने के बाद बैंकों द्वारा इसका प्रपोजल इन विभागों को भेजा जाता है।

ना केवल निजी बल्कि सरकारी विभाग जैसे आरडीए, हाउसिंग बोर्ड ने भी अपने ग्राहकों को सही समय पर सब्सिडी नहीं दिलाया है। दोनों विभागों के ग्राहक इन दिनों सब्सिडी के लिए भटक रहे हैं, वहीं विभागों ने जहां इसे बैंक की जिम्मेदारी बताई है, वहीं बैंक प्रबंधन का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी में देरी की जा रही है।

रिहायशी यूनिट (कार्पोरेट क्षेत्र) 30 वर्ग मीटर 60 वर्ग मीटर

एसबीआई के डीजीएम ब्रम्ह सिंह ने कहा कि आवास योजना के अंतर्गत बैंकों द्वारा केंद्र सरकार से अधिकृत नोडल एजेंसी को प्रपोजल भेज दिया जाता है। एजेंसी से सब्सिडी रिलीज किए जाने के बाद ही बैंकों द्वारा ग्राहकों के खाते में सब्सिडी ट्रांसफर की जाती है।

आरडीए के प्रभारी सीइओ एसआर दीवान ने कहा कि इस मामले में बैंक प्रबंधन और ग्राहक के बीच किए गए अनुबंध से सब्सिडी का मिलना और ना मिलना तय होता है। आरडीए में लंबित प्रकरणों को दिखवाया जाएगा।

पीएम आवास योजना के अंतर्गत रियल एस्टेट घरानों ने ब्याज में छूट के नाम पर ग्राहकों से बुकिंग कराई। 5 लाख के फ्लैट की कीमत 3.50 लाख रुपए रखी, ताकि ग्राहक आकर्षित हो सके। ग्राहकों ने मकानों की बुकिंग तो करा ली, लेकिन उनके खाते में सब्सिडी नहीं मिली। ऐसे में अब ना तो बिल्डर ग्राहकों के सवालों का जवाब दे रहे हैं और ना ही बैंक।

2. परिवार के मुखिया व उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम से भारत में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

Published on:
13 May 2018 11:19 am