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संभागायुक्त ने 12 कांग्रेसी पार्षदों को थमाया बर्खास्तगी का नोटिस, 9 पार्षद MIC मेंबर

नगर निगम में महापौर परिषद के सदस्य कांग्रेसी पार्षदों और आयुक्त के बीच दो साल पहले के विवाद ने एक बार फिर शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

May 13, 2018

PATRIKA

भिलाई. नगर निगम में महापौर परिषद के सदस्य कांग्रेसी पार्षदों और आयुक्त के बीच दो साल पहले के विवाद ने एक बार फिर शहर की राजनीति में हलचल मचा दी है। संभागायुक्त ने 12 कांग्रेसी पार्षदों को बर्खास्तगी की चेतावनी के साथ नोटिस थमा दिया है। इनमें 9 पार्षद महापौर परिषद के सदस्य हैं।

नोटिस में कहा गया है कि जवाब पेश नहीं करने पर एकतरफा बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। जब विवाद हुआ तब सभी पार्षद एमआईसी मेंबर थे। बाद में महापौर देवेन्द्र यादव ने तीन सदस्य को हटाकर पार्टी के ही पार्षदों को एमआईसी में शामिल किया है। सभी को ३१ मई दोपहर १२ बजे संभाग कार्यालय में स्वयं उपस्थित होने या फिर अधिकृत अधिवक्ता के माध्यम से जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आप ऐसे समझिए पूरे प्रकरण को
गोविंदा चौहान की शिकायत पर संभाग कार्यालय ने निगम आयुक्त से जवाब मांगा। निगम आयुक्त ने ४ अक्टूबर २०१७ को जवाब दिया। इसके बाद सालभर तक मामले की जांच की गई। 5 मई को संभागायुक्त के हस्ताक्षर से १२ पार्षदों को नगर पालिक निगम अधिनियम १९५६ की धारा-१९(१) के तहत नोटिस भेजा।

मामला नेता प्रतिपक्ष के चेंबर का
निगम में नेता प्रतिपक्ष के चेंबर को लेकर तात्कालीन निगम आयुक्त जीएस ताम्रकार से विवाद हुआ था। १५ मार्च २०१६ को तत्कालीन महापौर परिषद के १२ सदस्य नेता प्रतिपक्ष के चेंबर आवंटन और खर्च के संबंध में आयुक्त से शिकायत करने गए। तब वहां विवाद की स्थिति बन गई। आयुक्त ताम्रकार ने १६ मार्च को सुपेला थाने में १२ एमआईसी सदस्यों के खिलाफ लिखित में शिकायत की।

अध्यक्ष स्वच्छता विभाग लक्ष्मीपति राजू ने बताया कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर पार्षदों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा १८६, ३४ के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। इसी आधार पर सुपेला निवासी गोविंदा चौहान ने एमआईसी सदस्यों के खिलाफ संभागायुक्त से शिकायत की। चुनाव से पहले हम पर दबाव बनाया जा रहा है। पुलिस इस प्रकरण में दो साल पहले खात्मा कर चुकी है। उसी केस में हमें भाजपा के नेताओं के इशारे पर झूठे आरोप में फंसाया जा रहा है। क्या हम जनप्रतिनिधि आयुक्त के पास जा नहीं सकते?

नेता प्रतिपक्ष रिकेश सेन ने बताया कि कांग्रेसियों के बीच की आपसी लड़ाई है। कांग्रेस के गोविंदा चौहान ने शिकायत की है। मेरी शिकायत महापौर के खिलाफ है। मैं इस मामले में सोमवार को आयुक्त से मुलाकात करूंगा। रायपुर में दर्ज शिकायत पर महापौर के खिलाफ संभागायुक्त से कार्रवाई की मांग करूंगा।

बड़ा सवाल
ये कैसे साक्ष्य जो पुलिस को नहीं मिले लेकिन आयुक्त ने खोज निकाले
पुलिस ने केस में खात्मा लगाया : सुपेला पुलिस साक्ष्य के अभाव में केस को दो पहले ही खात्मा कर चुकी है। सुपेला थाना प्रभारी ने साक्ष्य के अभाव में ६ मई २०१६ को प्रकरण को खात्मा करने का उल्लेख किया है। पार्षद सत्येन्द्र बंजारे ने इस मामले की सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाही थी। जवाब में थाना प्रभारी ने प्रकरण को ३२/१६ के तहत चाक करने की जानकारी दी है।

आयुक्त ने बर्खास्तगी की अनुंशसा
संभागायुक्त की ओर से पार्षदों को जारी नोटिस में यह कहा गया है कि नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त से ४ अक्टूबर 2017 के पत्र के संबंध में २४ अप्रेल २०१८ को प्रत्र प्राप्त हुआ है। जिसमें आपके विरूद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। उक्त आधार पर संभाग दुर्ग के न्यायालय में २९०-ब-१२१ (२०१७-१८) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।