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सूखा के बाद अब प्याज निकाल रहा किसानों का आंसू

बाजार में नहीं मिल रहा प्याज का सही भाव, लागत भी नहीं निकल रहा, किसानों को हो रहा नुकसान

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बेमेतरा. प्याज उत्पाद करने वाले किसान इन दिनों परेशान है। वजह है उन्हें उनकी उपज का कम रेट मिलना। गर्मी में प्याज की खपत बढ़ जाती है, लेकिन प्याज की कीमत कम मिलती है। सूखा झेल रहे किसानों ने सिंचाई साधन उपलब्ध होने पर नगदी फसल के रूप में प्याज की खेती की। जब बेचने का समय आया तो उन्हें कम दर मिल रहा है। इससे लागत भी नहीं निकल पा रही है।

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थोक में 3 से 6 रुपए किलो बिक रहा प्याज
खुदरा बाजार में प्याज 10 रुपए दर पर बेचा जा रहा है। वहीं थोक बाजार में उसकी कीमत 3 से लेकर 6 रुपए किलो बिक रहा है। प्याज उत्पादन करने वाले लोलेसरा के किसान संतोष वर्मा, गांगपुर के किसान मोहन दास एवं किरकी के किरकी के संतोष वर्मा ने बताया कि प्याज का उत्पादन इस बार अच्छा हुआ है। उन्होंने बताया कि प्याज की फसल में 3 से 4 बार निंदाई-गुड़ाई करना पड़ता है। कीटनाशक व खाद की कीमत जोड़ी जाए तो बाजार के थोक मूल्य से लागत निकल पाना मुश्किल है।

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लोकल प्याज की मांग कम
बताना होगा कि नासिक महाराष्ट्र से प्याज कि बम्पर आवक होने से स्थानीय प्याज का मूल्य कम है। थोक व्यापारियों के अनुसार लोकल प्याज का भंडारण करने से प्याज के कम पके होने से जल्दी खराब हो सकता है। जबकि नासिक से आने वाले प्याज में ऐसी दिक्कतें नहीं आती है।
कोरबा व बलौदाबाजार जाना पड़ रहा किसानों को
थोक व्यापारी हरीश कुमार ने बताया कि लोकल प्याज की मांग कम होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है। जिले की मिट्टी व जलवायु दोनों ही प्याज व लहसुन के लिए अनुकूल है। इसके कारण किसान बरसात में धान की खेती करने के बाद निर्धारित समय में प्याज की खेती करते हैं। जिससे प्याज का उत्पादन अच्छा आता है। पैदावारी बेहतर होने के बाद बाजार बेचने के लिए किसानों को बेमेतरा से बाहर कोरबा बालौदा बाजार तक जाना पड़ रहा है। दीगर प्रदेश से अच्छे किस्म के प्याज का अधिक आने से किसानों को भाव गिरने का डर सताने लगा है।

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