
देवभोग@आदित्य बेहेरा।PM Awas Yojana: गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना में लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। पहली किश्त की राशि लेने के बाद भी 86 हितग्राहियों ने आवास निर्माण शुरू नहीं कराया। लंबे समय तक इंतजार के बाद अब ग्राम पंचायतों ने ऐसे हितग्राहियों के आवास निरस्त करने और जारी राशि की वसूली की तैयारी शुरू कर दी है। ब्लॉक की चार ग्राम पंचायतों में ग्रामसभा के माध्यम से प्रस्ताव पारित कर संबंधित दस्तावेज जनपद पंचायत कार्यालय भेजे गए हैं। इनमें गिरसुल के 45, माडागांव के 20, कदलीमुड़ा के 17 और डूमरपीटा के चार हितग्राही शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2022-23 में 1.30 लाख रुपए और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2024-25 में 1.20 लाख रुपए की लागत से आवास स्वीकृत किए गए थे। इनमें कई हितग्राहियों ने 25 से 40 हजार रुपए तक की पहली किश्त निकाल ली, लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया। अब पंचायतों ने आवास निरस्त करने और राशि वसूली के लिए प्रस्ताव भेजे हैं।
वहीं ग्राम पंचायत गिरसुल में चौहान-दुर्जन, कवि माझी-विक्रम, आनंद-कुम्भकरण, मिथुला-टीकम, जगरनाथ-केशवो, योगेन्द्र-गुलवादन और गिरधारी-शौभराम सहित कुल 45 हितग्राहियों के आवास निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया है। ग्राम पंचायत डूमरपीटा के चार हितग्राहियों के खिलाफ भी प्रस्ताव भेजा गया है।
इस मामले में अधिकारियों और पंचायतकर्मियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहली किश्त जारी होने के बाद आवास निर्माण की नियमित निगरानी करना पंचायत अमले और योजना से जुड़े मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद लंबे समय तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। सवाल यह है कि जनपद स्तर के अधिकारियों ने नियमित निरीक्षण किया या नहीं, हितग्राहियों को निर्माण के लिए प्रोत्साहित करने, समझाइश देने और समय पर नोटिस जारी करने की पहल क्यों नहीं हुई, यदि शुरुआत से ही प्रभावी निगरानी की जाती तो शायद आज निरस्तीकरण और वसूली की नौबत नहीं आती।
पंचायतों से मिले प्रस्तावों के आधार पर जनपद पंचायत ने चार हितग्राहियों के दस्तावेज प्रकरण दर्ज करने के लिए एसडीएम कार्यालय भेजे हैं। इनमें खिरसिंग यादव, टीकेमनी सोनवानी, जमुना बाई और सातोदीप शामिल हैं। कुछ हितग्राहियों ने पहली किश्त की राशि अन्य जरूरतों में खर्च होने और सीमेंट, छड़, गिट्टी और रेत की बढ़ती कीमतों को निर्माण में देरी का कारण बताया है। अब प्रशासन के सामने केवल राशि की वसूली और आवास निरस्त करने का सवाल नहीं है, बल्कि निगरानी व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
हितग्राहियों ने राशि लेने के बाद निर्माण नहीं कराया तो यह भी जांच का विषय है कि अधिकारियों और पंचायतकर्मियों ने समय रहते आवास पूरा कराने के लिए क्या प्रयास किए। ऐसे में कार्रवाई केवल हितग्राहियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। निगरानी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायतकर्मियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
ग्राम पंचायत माडागांव से मैनाबाई-गिरधारी, सोनवानी-सुकमन, नरहरि जगत-गोकुल जगत, कार्तिक राम-घुराम, तुलाराम-मोहन, दीजाराम-धनेश्वर, धनीराम यदु-मंगलराम यदु, सोनधर माली, थायबर यदु-गोवर्धन यदु, सोनूराम-रायधर, डिंगर-मोहन, जगतराम-दुतियाराम, नरसिंग बीसी-श्रीधर, भीमसेन-श्यामलाल, लखीधर बीसी-अंकुर, छेवीप्रसाद बीसी-रामधर, भगत राम-दयाराम, चन्द्रशेखर-श्यामलाल, गोपाल बीसी-भुजबल और अनंतराम-चंद्रभान सहित 20 हितग्राहियों के नाम शामिल हैं।
इसी तरह ग्राम पंचायत कदलीमुड़ा से द्रोपती-चमरूराम, हीरेंद्रि नागेश-सुंदरलाल, जमुना बीसी-मनमोहन, लीलेंद्रि नागेश-चूमनलाल, मिथुला नागेश-डिलेश्वर नागेश, रूपचंद नागेश-भक्ति नागेश, ईश्वर नागेश-महेंद्र, प्रेमशीला बीसी-शेषमल बीसी, खेमराज-बृजलाल और बेलोबाई-लक्ष्मण सहित 17 हितग्राहियों के खिलाफ प्रस्ताव भेजा गया है।
जागेंद्र साहू, सीईओ, जपं देवभोग के मुताबिक, जिस-जिस ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मिलते जा रहे हैं, उन्हें एसडीएम कार्यालय भेजा जा रहा है।
जितेंद्र नेताम, सचिव, ग्राम पंचायत कदलीमुड़ा के मुताबिक, ग्रामसभा में प्रस्ताव पारित करने के बाद लंबे समय से आवास निर्माण में रुचि नहीं लेने वाले हितग्राहियों के आवास निरस्त करने का प्रस्ताव जनपद पंचायत को भेजा गया है।