रायपुर

‘जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराएं हैं छत्तीसगढ़ की पहचान’, स्थापना दिवस पर PM मोदी ने दी बधाई

Chhattisgarh Foundation Day: छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक धरोहरों, नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों और विकास यात्रा की सराहना की।
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Updated: 1 Nov 2026, 10:01 AM IST
Chhattisgarh 26 Years
छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर PM मोदी का संदेश (Photo Source- Patrika Create)

Chhattisgarh 26 Years: छत्तीसगढ़ के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक धरोहरों और अनूठी लोक परंपराओं की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं और लोक परंपराओं के कारण देश में अलग पहचान रखता है। इसके साथ ही उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ जारी प्रयासों और राज्य की विकास यात्रा का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री का यह संदेश राज्य स्थापना दिवस के मौके पर आया है। एक नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ देश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया था। पिछले 26 वर्षों में प्रदेश ने अपनी अलग सांस्कृतिक, सामाजिक और औद्योगिक पहचान बनाई है। स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने राज्य की इन्हीं विशेषताओं को अपने संदेश में प्रमुखता से रखा।

Chhattisgarh Sthapna Diwas: जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं की PM मोदी ने की तारीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश की शुरुआत छत्तीसगढ़ के लोगों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा, 'छत्तीसगढ़ के सभी निवासियों को राज्य के स्थापना दिवस की अनेकानेक शुभकामनाएं!' प्रधानमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा, 'यह प्रदेश अपनी जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और अनूठी लोक परंपराओं के लिए प्रख्यात है। राज्य की पुरातात्विक धरोहरें इसकी विशेष पहचान रही हैं।' उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में मौजूद अपनेपन की भावना की भी सराहना की। प्रधानमंत्री के संदेश में प्रदेश की उन विशेषताओं का जिक्र रहा, जो छत्तीसगढ़ को देश के दूसरे राज्यों से अलग पहचान देती हैं।

बस्तर से सरगुजा तक जनजातीय परंपराओं की अलग पहचान

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान में जनजातीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों की अपनी परंपराएं, भाषा, वेशभूषा, खानपान और जीवनशैली है। बस्तर का दशहरा, पारंपरिक लोकनृत्य, मांदर की थाप, लोकगीत और हस्तशिल्प प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। वहीं, सरगुजा क्षेत्र की जनजातीय परंपराएं और स्थानीय त्योहार भी राज्य की सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाते हैं।

छत्तीसगढ़ की पहचान यहां के पारंपरिक त्योहारों, लोककलाओं और रीति-रिवाजों से भी जुड़ी है। हरेली, तीजा, पोला और छेरछेरा जैसे पर्व प्रदेश की ग्रामीण और लोक संस्कृति का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में इसी सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की सराहना की।

प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरें भी प्रदेश की ताकत

छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों के लिहाज से समृद्ध राज्य माना जाता है। यहां घने जंगल, नदियां, पहाड़, जलप्रपात और खनिज संपदा मौजूद हैं। प्रदेश के कई पर्यटन स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाने जाते हैं। इसके अलावा राज्य की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरें भी इसकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सिरपुर, बारसूर, मल्हार और रतनपुर जैसे स्थान छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास की झलक दिखाते हैं। सिरपुर का प्राचीन लक्ष्मण मंदिर, बस्तर की ऐतिहासिक विरासत और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद पुरातात्विक स्थल छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक समृद्धि को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री ने भी अपने संदेश में इन धरोहरों को राज्य की विशिष्ट पहचान का हिस्सा बताया।

नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों और विकास यात्रा का जिक्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में नक्सलवाद के खिलाफ किए जा रहे प्रयासों और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का भी उल्लेख किया। लंबे समय तक प्रदेश के बस्तर संभाग के कई इलाके नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। इसके कारण इन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित हुआ। अब इन इलाकों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने, कनेक्टिविटी सुधारने और स्थानीय लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयास भी राज्य की मौजूदा चुनौतियों और बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

26 साल में छत्तीसगढ़ ने बनाई अलग पहचान

एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बना था। गठन के बाद से प्रदेश ने कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बिजली जैसे क्षेत्रों में विकास की लंबी यात्रा तय की है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर और कोरबा जैसे शहर औद्योगिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बने हैं। वहीं, बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन, वन संपदा और स्थानीय संसाधनों के जरिए विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं।स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और विकास की दिशा को रेखांकित करता है। छत्तीसगढ़ के लिए यह अवसर अपनी उपलब्धियों को याद करने के साथ भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर आगे बढ़ने का भी है।

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1 Nov 2026, 10:01 AM IST
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