रायपुर

रेलवे स्टेशन पर गूंजी किलकारी, 108 एम्बुलेंस बनी फरिश्ता, मां और नवजात की बचाई जान

Raipur Railway Station: रायपुर रेलवे स्टेशन के गेट नंबर-2 पर गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। 108 एम्बुलेंस टीम ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित प्रसव कराया, जिससे मां और नवजात दोनों की जान बच गई।

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May 09, 2026
रेलवे स्टेशन पर 108 टीम बनी फरिश्ता (photo source- Patrika)

@विनोद जैन/Raipur Railway Station: रायपुर रेलवे स्टेशन के गेट नंबर-2 पर उस समय भावुक माहौल बन गया, जब घर लौट रही गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। गरियाबंद जिले के ग्राम मड़वा पत्थरा निवासी रूखमणि मांझी (32 वर्ष), पति जुगलेश मांझी, कोरबा से मजदूरी कर अपने गांव लौट रही थीं।

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मां और नवजात दोनों स्वस्थ

इसी दौरान स्टेशन परिसर में उनकी तबीयत बिगड़ गई और दर्द तेजी से बढ़ने लगा। मौके पर मौजूद एक महिला ने मानवता दिखाते हुए तत्काल 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। सूचना मिलते ही एम्बुलेंस टीम मौके पर पहुंची। ईएमटी टेक्नीशियन पन्ना लाल साहू और पायलट रविन्द्र ने सूझबूझ और तत्परता के साथ महिला का सुरक्षित प्रसव कराया।

Raipur Railway Station: रेलवे स्टेशन परिसर में ही नवजात की किलकारी गूंज उठी। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों स्वस्थ पाए गए। प्राथमिक उपचार देने के बाद एम्बुलेंस टीम ने दोनों को बेहतर इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल रायपुर में भर्ती कराया।

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बेटी के जन्म पर दिखी खुशी की मिसाल!

धमतरी शहर में एक अनोखी और भावनात्मक खुशी का नज़ारा देखने को मिला, जब एक परिवार ने 24 साल बाद जन्मी बेटी का स्वागत ऐसे किया, मानो कोई बड़ा उत्सव हो। मकेश्वर वार्ड निवासी रूपेश कोसरिया और उनकी पत्नी किरण कोसरिया के घर 1 अप्रैल को पहली संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ। परिवार के लिए यह पल बेहद खास था, क्योंकि कोसरिया वंश में पूरे 24 वर्षों के बाद किसी बेटी ने जन्म लिया था।

इस खुशी को परिवार ने सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे शहर के साथ साझा किया। 6 अप्रैल को जब मां और नवजात को धमतरी-रायपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल से घर लाया जा रहा था, तब स्वजनों ने स्वागत को यादगार बनाने के लिए भव्य आयोजन किया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, धूमाल की धुन और आतिशबाजी के बीच करीब डेढ़ से दो किलोमीटर तक सड़क पर जश्न मनाया गया। परिजन और स्थानीय लोग पूरे रास्ते नाचते-गाते हुए बेटी को घर लेकर पहुंचे।

“रविशंकर” नाम से गूंजा गांव का आंगन

सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।

एक माह के नवजात का CM साय ने किया नामकरण

इसी दौरान ग्राम की निवासी ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी।

Updated on:
09 May 2026 04:49 pm
Published on:
09 May 2026 04:43 pm
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