Railway Project: नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा के बीच प्रस्तावित पांचवीं और छठवीं लाइन के रूप में विकसित की जा रही है। इससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के व्यस्त रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा।
Railway News: नवा रायपुर को नई रेलवे कनेक्टिविटी देने की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा नई रेल लाइन परियोजना के लिए रायपुर जिले के अंतर्गत आने वाली जमीनों की सूची जारी करते हुए दावा-आपत्ति के लिए 30 दिन का समय दिया है। इसके साथ ही जमीन अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। विशेष रेल योजना के तहत बनने वाली इस नई लाइन से नवा रायपुर की रायगढ़ और राजनांदगांव औद्योगिक क्षेत्रों से सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी मुदित भटनागर के मुताबिक परियोजना का कुल क्षेत्रफल करीब 154 हेक्टेयर में विस्तारित है। शुरुआती चरण में रायपुर जिले के अंतर्गत 12.95 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। रेलवे की ओर से जारी अधिसूचना में मंदिर हसौद क्षेत्र के धमनी, गुजरा, गनौद, रींवा, टेकारी, नारा, डिघारी और खौली समेत कई गांवों को परियोजना के दायरे में शामिल किया गया है। इन गांवों के प्रभावित भू-स्वामियों से निर्धारित समय-सीमा के भीतर दावा और आपत्ति प्रस्तुत करने कहा गया है।
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक यह रेल परियोजना नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा के बीच प्रस्तावित पांचवीं और छठवीं लाइन के रूप में विकसित की जा रही है। इससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के व्यस्त रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और नई राजधानी क्षेत्र की रेल पहुंच भी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। वर्तमान में नवा रायपुर को राजिम रेल कॉरिडोर से जोडऩे की योजना पर काम चल रहा है, वहीं अब रायगढ़ की दिशा में नई रेल कनेक्टिविटी का रास्ता खुलने से राजधानी क्षेत्र का विस्तार और तेज होने की उम्मीद है।
इस परियोजना को केंद्र सरकार ने भी प्राथमिकता में रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में देश की चार मल्टी ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिसमें यह प्रोजेक्ट भी शामिल है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि लाइन शुरू होने के बाद रायपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए माल परिवहन का नया विकल्प तैयार होगा। नई रेल लाइन का सीधा फायदा बलौदाबाजार और उससे जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों को भी मिलेगा। इससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश को मजबूत आधारभूत संरचना मिलेगी।
योजना का नाम - मल्टी ट्रैकिंग परियोजना
कनेक्टिविटी - छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा
जिले व दूरी - 15 जिलों को मिलाकर 1247 किमी.
कुल लागत - 18658 करोड़
छत्तीसगढ़ की सीमा की लंबाई - 248 किमी.
डीजल की बचत - 22 करोड़ रुपए
रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव