रायपुर

रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर मौत का सफर? 124 किमी में 3000 से ज्यादा पेचवर्क, फिर भी सड़क बदहाल

Highway Road Condition: रायपुर से बिलासपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-130 की बदहाली ने सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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Sep 10, 2026
Poor Road Condition Raipur Bilaspur Highway 3000 Patchworks
सड़क बदहाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@हिमांशु शर्मा। Raipur Bilaspur Highway: रायपुर से बिलासपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-130 की बदहाली को लेकर 'पत्रिका' द्वारा चलाए जा रहे जनहित अभियान के तहत बुधवार को हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद जब जमीनी पड़ताल की गई, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। खुलासा हुआ है कि 124 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर तीन हजार से ज्यादा जगहों पर घटिया पेचवर्क किया गया है। गुणवत्ता खराब होने के कारण ये पेचवर्क बनने के अगले ही दिन उखड़ने लगे हैं, जिससे यह हाईवे कम और हादसों का जाल ज्यादा नजर आ रहा है।

घटिया मरम्मत के कारण हाईवे समतल होने के बजाय पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ हो चुका है। कई स्थानों पर पेचवर्क को जिक-जैक और सांप-सीढ़ी की तरह टेढ़ा-मेढ़ा छोड़ दिया गया है। इससे सबसे अधिक परेशानी टू-व्हीलर चालकों को हो रही है। पेचवर्क वाले हिस्सों में पहुंचते ही दोपहिया वाहन अनबैलेंस हो रहे हैं, जिससे चालकों के गिरने और गंभीर हादसे का शिकार होने का खतरा बना हुआ है। वहीं, फोर-व्हीलर वाहनों को भी तेज झटके लग रहे हैं।

अंधेरा और मवेशियों का झुंड बढ़ा रहे हादसों का ग्राफ

हाईवे पर हादसों की वजह सिर्फ जानलेवा पेचवर्क और गड्ढे ही नहीं हैं, बल्कि जलती न रहने वाली स्ट्रीट लाइटें और बेसहारा मवेशी भी बड़ी वजह बन चुके हैं। रायपुर से बिलासपुर तक 124 किलोमीटर के इस सफर में 50 किमी से भी अधिक हिस्से में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं और सड़कें घने अंधेरे में डूबी रहती हैं। ऐसे में रात के समय वाहन चालकों को गड्ढों का सही अंदाजा ही नहीं हो पाता।

सिलतरा, धरसींवा, तरपोंगी, सोमनाथ, बेमेतरा, सिमगा, किरवई, दामाखेड़ा, लिमतरा और नांदघाट जैसे कई इलाके दुर्घटना के ब्लैक स्पॉट बन चुके हैं। इन स्थानों पर रोजाना 200 से अधिक मवेशी सड़क के बीचों-बीच बैठे रहते हैं। रात के अंधेरे में मवेशी दिखाई न देने के कारण आए दिन भीषण दुर्घटनाएं हो रही हैं।

50 किमी सड़क पर अंधेरा, भगवान भरोसे सफर

रायपुर से सिमगा तक 45 किलोमीटर के दायरे में 30 किलोमीटर से अधिक दूरी पर एक भी लाइट नहीं जल रही है। यही हाल बिलासपुर की ओर का भी है, जहां 50 किलोमीटर से अधिक हिस्से पर अंधेरा पसरा रहता है।रात में केवल गाड़ियों की हेडलाइट ही चालकों का एकमात्र सहारा होती है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों का कहना है कि यदि रात के वक्त किसी वाहन की लाइट खराब हो जाए, तो चालक की जान पूरी तरह भगवान भरोसे हो जाती है। घटिया निर्माण और प्रशासनिक अनदेखी के कारण अरबों रुपये की लागत से बना यह सिक्स लेन हाईवे आम जनता के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

Updated on:
10 Sept 2026 01:03 pm
Published on:
10 Sept 2026 01:03 pm