
Janmashtami 2026: जन्माष्टमी पर राजधानी में आधी रात को मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ा। घड़ी की सुई रात ठीक 12 पर पहुंचते ही नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल के जयघोष से उत्सव परिसर गूंजे। पालनहार सांवरे कन्हैया ने जन्म लिया। उनकी बलैया लेने के लिए हजारों हाथ उठे। मोहल्ले, कॉलोनियों से लेकर मठ-मंदिरों में कान्हा की झांकियां सजीं। पूजा, अभिषेक कर विशेष शृंगार किया गया। सुबह से मंदिरों में तांता लगा। माहौल जैसे मथुरा-वृंदावन उतर आया हो। शहर के कोतवाली थाने की बंदिशें टूट गईं और इस्कॉन मंदिर टाटीबंध में आस्था का सैलाब नजर आया।
भगवान के जन्म की झांकी की एक झलक पाने के लिए भक्तों के बीच होड़ मच गई। जैसे ही वासुदेव के रूप में कान्हा को टोकनी में लेकर मंदिरों से निकले तो भगवान का जन्मोत्सव जीवंत हो उठा। जयकारे, शंखनांद, आतिशबाजी से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
प्राचीन जैतूसाव मठ में कान्हा का हिंडोला सजा और मंगल गीतों की बहार रही। महिला मंडलियों ने सोहर गीत गाते हुए कान्हा के जन्म का चित्रण किया। वहीं परिसर में मालपुआ का पकवान 56 भोग के लिए तैयार किया गया।
रात 10 बजते ही राधाकृष्ण मंदिरों में पहुंचने के लिए भक्तों का रेला चला। समता कॉलोनी राधाकृष्ण मंदिर में 101 किलो दूध से अभिषेक, शृंगार और महाआरती की गई है। खाटू श्याम प्रभु को फूलों से सजाया गया। दोनों मंदिरों में भजनों की प्रस्तुतियों के बीच भगवान का जन्म उत्सव साकार हुआ। महाआरती में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
सिटी कोतवाली के बंदी गृह में कान्हा के जन्म प्रसंग की कथाएं जीवंत हुईं। माता देवकी और वासुदेव की हथकडि़यां खुलीं। पहरेदार इधर से इधर नींद में लुढ़के। जैसे ही टोकनी पर कान्हा को लेकर बसुदेव निकले तो श्रद्धालुओं का रेला साथ चला। देखते ही देखते सदरबाजार का गोपाल मंदिर गोकुलधाम में तब्दील हो गया। शंखनांद, बंशी के ध्वनि पर अभिनंदन। महाआरती में कान्हा के जयकारे की गूंज। एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में होड़। महाआरती के साथ माखन, मिश्री का भोग और प्रसाद बंटा।