छत्तीसगढ़ के रणजी खिलाडिय़ों को पहली बार अपने घरेलू मैदान में लीग मैच खेलने का मौका मिलेगा। बीसीसीआई ने फिर से रणजी क्रिकेट ट्रॉफी के लीग दौर में होम-अवे प्रारूप को बहाल करने का निर्णय लिया है। यह फैसला मंगलवार को सौरव गांगुली की अध्यक्षता वाली तकनीकी समिति की बैठक में लिया गया। गत वर्ष 2016-17 में बीसीसीआई ने रणजी क्रिकेट के सभी मैच तटस्थ स्थलों पर आयोजित किए थे। इसके बाद घरेलू टीमों के कप्तानों ने बोर्ड के कार्यक्रम में तटस्थ स्थलों पर मैच कराने के प्रारूप पर निराशा जताई थी।
आधे मैच होंगे घरेलू मैदानों पर
बीसीसीआई के कार्यकारी सचिव अमिताभ चौधरी अनुसार रणजी ट्रॉफी के केवल लीग मैच होम-अवे प्रारूप में खेले जाएंगे, जैसे की दो सत्र पहले खेले जाते थे। ऐसे में छत्तीसगढ़ को जिस ग्रुप में जगह मिलेगी, उस ग्रुप के आधे लीग मैच उसे अपने घरेलू मैदान रायपुर में खेलने का मौका मिलेगा और आधे दूसरे राज्यों में खेलने होंगे। चौधरी ने कहा कि नॉकआउट मैच तटस्थ स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे। दिलीप ट्रॉफी गुलाबी गेंद से ही खेली जाएगी और उसके अधिकतर मैच दिन-रात प्रारूप में होंगे।
आज घोषित हो सकता है कार्यक्रम
छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ के सचिव राजेश दवे ने बताया कि बीसीसीआई 2 अगस्त को रणजी क्रिकेट ट्रॉफी का कार्यक्रम जारी कर सकता है। इस वर्ष भी 6 अक्टूबर से रणजी ट्रॉफी की शुरुआत होने की संभावना है।
एलीट टीमों से खेलने का मिलेगा मौका
बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने इस वर्ष रणजी की कुल 28 टीमों को तीन की जगह 4 ग्रुप में बांटने का निर्णय लिया है। इसकेकारण एलीट और प्लेट ग्रुप का सिस्टम खत्म हो जाएगा। टीमों को किसी भी ग्रुप में जगह दी जा रही है। ऐसा होने पर छत्तीसगढ़ को भी मुंबई, गुजरात और मध्यप्रदेश जैसी बड़ी टीमों के साथ खेलने का मौका मिल सकता है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रदेश के खिलाडिय़ों को ज्यादा एक्सपोजर मिलने की संभावना है। प्रत्येक ग्रुप की शीर्ष दो टीमें क्वालीफायर राउंड में जाएंगी।