
Raipur Municipal Corporation: डामर (बिटुमिन) की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का असर अब राजधानी रायपुर में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़ी लागत के चलते ठेकेदारों ने कई सड़कों का काम रोक दिया है। स्थिति यह है कि 15वें वित्त आयोग की राशि से बनाई जा रही छह सड़कों का निर्माण प्रभावित हो रहा है। इसे देखते हुए रायपुर नगर पालिक निगम ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को पत्र लिखकर डामर की बढ़ी कीमतों के अनुरूप निर्माण कार्यों की दरें संशोधित करने की अनुमति मांगी है।
निगम ने अपने पत्र में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसके तहत डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए ठेकेदारों को आंशिक राहत देने का निर्णय लिया गया था। निगम का कहना है कि निर्माणाधीन सड़कों को तकनीकी मानकों के अनुरूप जल्द पूरा कराना जरूरी है। ऐसे में दरों में संशोधन की अनुमति मिलने से रुके हुए काम दोबारा शुरू कराने में मदद मिल सकती है।
सड़क निर्माण में डामर एक प्रमुख सामग्री है। इसकी कीमतों में तेजी आने से निर्माण कार्य की कुल लागत बढ़ जाती है। ऐसे में पहले से तय अनुबंध दरों पर काम करना ठेकेदारों के लिए मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से रायपुर में 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कुछ डामरीकरण कार्य प्रभावित हुए हैं।
निगम के पत्र के मुताबिक, डामर की कीमतों में अप्रत्याशित और असाधारण वृद्धि के कारण सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण से जुड़े अनुबंधित कार्यों को पूरा कराने के लिए दरों में राहत की जरूरत है। काम रुकने से न केवल निर्माण की समयसीमा प्रभावित हो रही है, बल्कि इन सड़कों से रोजाना गुजरने वाले नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
डामर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने पहले ही ठेकेदारों को आंशिक राहत देने के लिए दरों में संशोधन का आदेश जारी किया था। आदेश में खाड़ी युद्ध जैसी वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बिटुमिन के मूल्य में हुई असाधारण वृद्धि का उल्लेख किया गया था।
राज्य सरकार ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डामरीकृत सड़कों के निर्माण, नवीनीकरण और संधारण से जुड़े अनुबंधित कार्यों को जल्द पूरा कराने के उद्देश्य से राहत देने का निर्णय लिया था। रायपुर नगर निगम ने इसी आदेश को आधार बनाकर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से अपने कार्यों के लिए भी ऐसी अनुमति देने का अनुरोध किया है।
15वें वित्त आयोग की राशि से रायपुर शहर में कई प्रमुख मार्गों पर डामरीकरण का काम कराया जा रहा है। इन सड़कों पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। निगम ने विभाग को भेजे पत्र में छह निर्माणाधीन सड़कों की स्थिति का उल्लेख किया है। इनमें से दो सड़कों पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वहीं, अन्य चार सड़कों पर काम अलग-अलग स्तर पर पूरा हुआ है। एक सड़क का निर्माण 60 प्रतिशत, दूसरी का 50 प्रतिशत और तीसरी का 40 प्रतिशत पूरा बताया गया है।
चौथी सड़क पर महज 10 प्रतिशत काम ही हो सका है। निर्माण की यह स्थिति बताती है कि दरों में बढ़ोतरी और लागत से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं होने पर इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि, निगम के पत्र में इन छह सड़कों के नामों का उल्लेख नहीं किया गया है।
निगम ने विभाग को बताया है कि इन कार्यों को पूरा कराने के लिए शेष राशि और जीएसटी में होने वाली बचत को मिलाकर कुल 458.76 लाख रुपए उपलब्ध हैं। इसी राशि से डामर की पुरानी और बढ़ी हुई दर के बीच के अंतर का भुगतान करने की अनुमति मांगी गई है। इसके लिए निगम ने गणना सूत्र के अनुसार अतिरिक्त भुगतान करने का प्रस्ताव रखा है।
निगम का तर्क है कि उपलब्ध राशि का उपयोग कर निर्माण लागत में आई बढ़ोतरी की भरपाई की जा सकेगी और सड़क निर्माण कार्यों को दोबारा गति मिल सकती है। हालांकि, यह भुगतान फिलहाल प्रस्ताव के स्तर पर है। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की अनुमति जरूरी होगी। विभाग की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दरों में संशोधन किस तरह लागू किया जाएगा और ठेकेदारों को कितनी राहत मिल सकेगी।
रायपुर के प्रमुख मार्गों पर डामरीकरण का काम पूरा होना शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य अधूरे रहने से सड़क उपयोगकर्ताओं को असुविधा हो सकती है। वहीं, निर्माण में देरी होने पर परियोजनाओं की समयसीमा भी आगे बढ़ सकती है। अब निगाहें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के फैसले पर हैं। यदि निगम के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो डामर की बढ़ी कीमतों के अंतर का भुगतान करने का रास्ता खुल सकता है। इससे 15वें वित्त आयोग की राशि से चल रहे छह सड़क निर्माण कार्यों को पूरा कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, दरों में संशोधन और भुगतान को लेकर अंतिम निर्णय का इंतजार है।