रायपुर

Chhattisgarh Sand Mining: कल से खुलेंगी 7 खदानें, 3 साल की मोहलत, आखिर कब मिलेगी धूल से राहत?

Sand Mines Extension: छत्तीसगढ़ में सात रेत खदानों में कल से फिर खनन शुरू होने जा रहा है। पुरानी खदानों को तीन साल का एक्सटेंशन मिला है, लेकिन खदानों के आसपास रहने वाले ग्रामीण अब भी धूल और बदहाल सड़कों से परेशान हैं।
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Oct 15, 2026
Chhattisgarh Sand Ghats
नई रेत खदानें शुरू करने की तैयारी (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@हिमांशु शर्मा। Sand Mining: खदानों को राहत पर राहत मिल रही है, लेकिन खदानों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सड़कों पर उड़ती धूल, बदहाल रास्ते और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर उठते सवालों के बीच जिले की सात खदानें कल से फिर खुलने जा रही हैं। दूसरी ओर, वर्ष 2026 की नई रेत खदानों को अब तक एनओसी नहीं मिल पाई है।

ऐसे में सवाल उठता है कि खनन से जुड़े फैसलों में तेजी दिखाने वाला विभाग ग्रामीणों की समस्याओं और पर्यावरणीय मानकों की निगरानी को लेकर इतना सुस्त क्यों है? यहां तक कि कई रेत खदानों को तीन साल के लिए एक्सटेंशन दे दिया गया है। जबकि कई लोगों ने अबतक पर्यावरण एनओसी ( जल-वायु सम्मति) भी नहीं ली है। इसपर सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव ने बताया कि सभी ने अनुमति ले ली है।

ग्रामीणों का इंतजार बरकरार

10 जून से प्रतिबंध के बाद खनन बंद थी। अब सात खदानों को फिर से खोलने की तैयारी है। इसमें वैध रूप से संचालित रेत खदानों में कुरूद, लखना, कुम्हारी, पारागांव, हरदीडीह, चिखली-ए एवं चिखली-बी शामिल है। 7 पुरानी खदानों के अलावा अन्य 4 खदानें भी संचालित होगी। इनमें दो पुरानी खदाने मोहमेला-ए और कागदेही है। इसके अलावा दो नई खदाने चंपाझर-ए और चंपाझर-बी शामिल है।लेकिन जिन ग्रामीणों को खनन के दौरान धूल, भारी वाहनों की आवाजाही और खराब सड़कों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उनकी राहत के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए, यह बड़ा सवाल है।

नई खदानों की एनओसी अटकी, पुरानों को फिर मोहलत

एक तरफ वर्ष 2026 की नई खदानों को अब तक एनओसी नहीं मिली है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी खदानों को एक्सटेंशन दिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग नियमित नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय बार-बार एक्सटेंशन का रास्ता अपना रहा है। इससे पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, एक्सटेंशन और एनओसी की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से स्पष्ट होना जरूरी है।

पर्यावरणीय नियमों की निगरानी पर सवाल

खनन गतिविधियों के बीच पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना पर्यावरण विभाग की अहम जिम्मेदारी है। ग्रामीणों की शिकायत है कि धूल और खराब सड़कों जैसी समस्याओं पर कार्रवाई नहीं होती है। जबकि खदानों के कारण ग्रामीण धूल और खराब सड़कों से परेशान है। नियम के अनुसार धूल ना उड़े करके पानी डालना है, पर इस नियम का पालन ही नहीं किया जाता। पर्यावरण विभाग पर सवाल खड़े हो रहे है की यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो नियमित निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?

राजेश मालवे, उप संचालक खनिज विभाग रायपुर के मुताबिक, अभी सात खदानें शुरू होंगी, इनका तीन साल के लिए एक्सटेंशन बढ़ाया गया है। बाद में कुछ नई खदानें भी संचालित होंगी। इन्हें पर्यावरण विभाग से एनओसी मिल चुकी है।

पीके राबड़े, रीजनल ऑफिसर, रायपुर के मुताबिक, विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। जहां प्रदुषण की स्थिति और पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन होता है, वहां कार्रवाई की जाती है।

Updated on:
15 Oct 2026 01:25 pm
Published on:
15 Oct 2026 01:25 pm