
Guest Editor: अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी मरीज की मुश्किलें खत्म नहीं होतीं। घर पर व्हीलचेयर, मेडिकल बेड या ऑक्सीजन मशीन की जरूरत हो, तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने इन्हें जुटाने की चुनौती खड़ी हो जाती है। बिलासपुर के सतराम जेठमलानी ने करीब 12 साल पहले इसी परेशानी को महसूस किया और जरूरतमंद मरीजों को मेडिकल उपकरण निशुल्क उपलब्ध कराने की पहल शुरू की। आज यह पहल मरीजों की मदद से आगे बढ़कर बच्चों और किशोरियों की जरूरतों तक पहुंच गई है।
सतराम ने ऐसे परिवारों से उपयोग में नहीं आ रहे मेडिकल उपकरण जुटाने शुरू किए, जिनकी जरूरत अब खत्म हो चुकी थी। इन उपकरणों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया जाने लगा। धीरे-धीरे लोगों का सहयोग बढ़ा और डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार समेत कई लोग इस मुहिम से जुड़ गए। आज जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, मेडिकल बेड और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।
कोरोनाकाल में भी जारी रही मदद:कोरोनाकाल में ऑक्सीजन और जरूरी संसाधनों की कमी के बीच सतराम और उनकी टीम ने जरूरतमंदों की मदद जारी रखी। टीम के पास अब भी छह-सात ऑक्सीजन मशीनें हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। मदद के लिए कोई तय समय नहीं है। दिन हो या रात, फोन आने पर उपलब्ध संसाधनों से सहायता पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
स्कूलों में बच्चों और किशोरियों तक पहुंची पहल: सतराम की पहल अब 50 से अधिक स्कूलों तक पहुंच चुकी है। जरूरतमंद बच्चों को स्वेटर, कपड़े और जूते-चप्पल उपलब्ध कराए जाते हैं। वहीं, छात्राओं को मासिक धर्म और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए महिला रोग विशेषज्ञों की मदद से अभियान चलाया गया। सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने के साथ कुछ स्थानों पर पैड वेंडिंग मशीनें लगवाने की व्यवस्था भी की गई, ताकि छात्राएं बिना झिझक अपनी जरूरत पूरी कर सकें। सतराम के साथ बाद में माधव मजूमदार और दूसरे सहयोगी भी जुड़ गए।