
Raipur News: मानसूनी सीजन के बाद भी आंबेडकर अस्पताल के स्किन रोग विभाग की ओपीडी में 40 फीसदी मरीज फंगल इंफेक्शन व एलर्जी वाले आ रहे हैं। यहां मस्से व तिल को हटाने के लिए लेजर पद्धति है, जिस कारण इसके मरीजों की भीड़ ज्यादा रहती है। आंबेडकर अस्पताल के स्किन रोग विभाग में मरीजों को इस इलाज के लिए 10 से 15 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। इलाज फ्री होने के कारण मरीजों की लंबी कतार है। जबकि निजी अस्पतालों में लेजर से मस्सा या तिल हटाने पर तीन से साढ़े हजार रुपए खर्च हो जाता है।
स्किन रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 450 से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मेडिसिन विभाग के बाद सबसे ज्यादा मरीज इसी विभाग में आ रहे हैं। लाइफ स्टाइल व बढ़ते प्रदूषण के कारण स्किन संबंधी समस्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार रोजाना 30 से 35 मरीजों का मस्सा व तिल लेजर से हटाया जाता है। एक मरीज का मस्सा हटाने में 15 से 20 मिनट लग जाता है। बैटरी खराब होने के कारण मरीजों की वेटिंग बढ़ गई थी, जो नई बैटरी के बाद कम हो गई है। 2017 के बाद मशीन में दोबारा नई बैटरी लगाई गई है।
विभाग में फुल बॉडी फोटोथैरेपी चेंबर की सुविधा होने से गंभीर बीमारियों का इलाज हो रहा है। विटिलिगो, सोरायसिस, स्क्लेरोडर्मा, एक्ज़िमा, माइकोसिस फंगोइड्स जैसे जटिल बीमारियों का इलाज हो रहा है। ये इलाज फ्री में हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार निजी अस्पतालों में फोटोथैरेपी मशीन से हफ्ते में दो से तीन बार इलाज का खर्च 12 से 15 हजार रुपए तक होता है। वहीं आंबेडकर में आयुष्मान के तहत मरीजों का इलाज कैशलेस हो रहा है। प्रदेश में केवल आंबेडकर अस्पताल में ये मशीन है। इसका लाभ प्रदेशभर के मरीजों को मिल रहा है।
फुल बॉडी फोटोथैरेपी चेंबर एक विशेष प्रकार का इलाज है, जिसमें मरीज के शरीर को विशेष प्रकार के प्रकाश में रखा जाता है। यह प्रकाश त्वचा की समस्याओं को दूर करने में मदद करता है और मरीज को आराम देता है। मशीन होने से मरीजों को कई लाभ हुए हैं। जैसे मरीजों को विभिन्न जटिल स्किन बीमारी ठीक करने में मदद मिल रही है। यह दर्द रहित है और मरीज को कोई परेशानी नहीं होती। मशीन ओपीडी में ही है, जिससे मरीजों को अन्यत्र जाने की जरूरत नहीं है।
डॉ. मृत्युंजय सिंह, एचओडी स्किन विभाग आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, इन दिनों फंगल इंफेक्शन व एलर्जी के 40 फीसदी मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा एक्जिमा व अपरस के मरीज भी आ रहे हैं। रोजाना 30 से 35 मरीजों का लेजर पद्धति से मस्सा व तिल हटाया जा रहा है। फुल बॉडी फोटोथैरेपी चेंबर की सुविधा होने से स्किन संबंधी गंभीर बीमारियों का इलाज किया जा रहा है।