नारायणपुर नक्सली हमले में जा सकती थी और जवानों की जानें अगर एेन मौके पर सुरक्षा बलों ने नहीं किया होता UBGL (अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर) का इस्तेमाल।
रायपुर . छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले में गुमटेर व इरपानार के बीच हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों की टुकड़ी एंबुश की किलिंग जोन में फंस गई थी। चारों ओर से नक्सली फायरिंग कर रहे थे। पेड़ पर चढ़कर छुपे नक्सली भी गोलियां बरसा रहे थे। ऐसे में फंसे जवानों ने यूबीजीएल (अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर) का इस्तेमाल किया, जिससे नक्सली जंगल की आड़ में फायरिंग करते हुए भाग निकले।
रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती मुठभेड़ में घायल जवान संजय पटेल के मुताबिक जवानों की टुकड़ी जैसे ही गुमटेर से आगे निकली, वहां घात लगाए नक्सलियों ने उन पर भरमार, इंसास और मोर्टार से गोलियां बरसानी शुरू कर दिया। जवानों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी फायरिंग की। दोनों ओर से करीब दो घंटे तक लगातार फायरिंग होती रही। नक्सलियों का दबाव बढ़ता जा रहा था। ऐसे में बचने का कोई तरीका नहीं होने पर यूबीजीएल दागा गया।
इसी बीच कुछ ही देर में ओरछा थाना से निकली दूसरी पार्टी मौके पर पहुंची और उन्होंने बैकअप दिया। बैकअप मिलते ही जवानों ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की। जवानों को भारी पड़ता देखनक्सली भाग खड़े हुए। आमतौर पर यूबीजीएल का इस्तेमाल युद्धरत स्थानों पर सेना द्वारा किया जाता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बस्तर में नक्सली तीन तरह के एंबुश लगाते हैं। पहला लिनियर, दूसरा एल शेप और तीसरा वी शेप। लिनियर एंबुश जवानों के पैदल गुजरने के रास्ते के समानांतर लगाया जाता है। नारायणपुर जिले के गुमटेर व इरकापाल के बीच नक्सलियों ने लिनियर एंबुश लगाया था। एल शेप एंबुश घाटियों में मोड़ की जगह लगाया जाता है।
ऐसे में एल शेप में एंबुश लगाने से वहां से गुजरने वाले दो ओर से घिर जाते हैं। झीरम घाटी में कांग्रेस के काफिले पर नक्सलियों ने एल शेप एंबुश लगाकर हमला किया जा था। वी शेप एंबुश सबसे खतरनाक होता है। इसमें फंसने के बाद बचने की गुंजाइश कम होती है। इसमें क्रास फायरिंग का जोखिम होने से खास तौर पर प्रशिक्षित लोग शामिल होते हैं। झीरम टू हमले में नक्सलियों ने इसी तरह का एंबुश लगाया था।
यह है यूबीजीएल
अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर यानी यूबीजीएल अत्याधुनिक हथियार है। इसकी मारक क्षमता 200 मीटर तक होती है। इसमें दूर से धमाका करना आसान है। जिस जगह विस्फोट होता है वहां 20 से 25 मीटर तक बच पाना मुश्किल होता है। (ये फाइल वीडियो है)