
रायपुर . छत्तीसगढ़ सरकार की सख्ती का असर हड़ताल पर बैठे शिक्षाकर्मियों पर सातवें दिन देखा गया। रविवार को धरनास्थल पर शिक्षाकर्मियों की संख्या काफी कम देखी गई। धरनास्थल पर पंडाल का लगभग आधा हिस्सा खाली रहा। जबकि अपनी मांगों लेकर सातवें दिन हड़ताल पर बैठे राजधानी में शिक्षाकर्मियों ने संविधान दिवस मनाया। इस दौरान शिक्षाकर्मियों ने संविधान में दिए शिक्षाकर्मियों को संवैधानिक अधिकार देने की मांग की।
शिक्षाकर्मियों की मांगों को सरकार द्वारा अनसुना करने और बर्खास्तगी के फैसले पर शिक्षाकर्मी संगठन आगे की रणनीति को लेकर विचार कर रही है। संगठन के पदाधिकारी रविवार शाम आगे की रणनीति को लेकर बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार की सख्ती के बाद शिक्षाकर्मियों का जो मनोबल गिरा है उसे वापस उठाने के लिए मोर्चा के पदाधिकारी उग्र आंदोलन की घोषणा कर सकते हैं।
हड़ताल के बाद सरकार की पहली कार्रवाई
इससे पहले शनिवार को शिक्षाकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के छठवें दिन सरकार ने सख्ती दिखाते हुए रायपुर जिले के 5 शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। इसमें शासकीय प्राथमिक शाला गिरौद में पदस्थ पवन सिंह ठाकुर संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ, रायपुर के जिलाध्यक्ष हैं।
दूसरे जितेंद्र सिन्हा अभनपुर विकासखंड के अध्यक्ष हैं और शासकीय प्राथमिक शाला झांकी में पदस्थ हैं। पंचायत एवं नगरीय निकाय शिक्षक संघ के आरंग विकासखंड अध्यक्ष हरीश दीवान शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल खमतराई में तैनात हैं। हाईस्कूल सतभावा में पदस्थ संदीप नागपुरे व हाईस्कूल सांकरा में पदस्थ गुरजीत सिंह भी बर्खास्त शिक्षाकर्मियों की सूची में शामिल हैं।
रायपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीलेश क्षीरसागर ने बताया, जिले के 959 शिक्षाकर्मियों को हड़ताल से वापस लौटने के लिए सोमवार तक की मोहलत दी गई है। इनमें अन्य जिलों से तबादला होकर आए 220 शिक्षाकर्मी और 2012 में हड़ताल के दौरान बर्खास्त होने के बाद बहाल हुए 739 शिक्षाकर्मी शामिल हैं।
जनप्रतिनिधियों-अभिभावकों से मांगा समर्थन
शिक्षाकर्मियों ने अपनी हड़ताल के छठवें दिन जनप्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और अभिभावकों से समर्थन मांगा है। राजधानी में शिक्षाकर्मी महापौर प्रमोद दुबे, देवांगन समाज, ब्रह्मण समाज और साहू समाज के पदाधिकारियों से मुलाकात की। वहीं शिक्षाकर्मियों ने अभिभावकों के नाम पत्र लिखकर समर्थन मांगा है।