
अल्टीमेटम का शिक्षाकर्मियों ने इस अंदाज में दिया जवाब, सरकार को दिलाई घोषणा पत्र की याद
रायपुर . शिक्षाकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के छठवें दिन सरकार ने सख्ती दिखाते हुए रायपुर जिले के 5 शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। इसमें शासकीय प्राथमिक शाला गिरौद में पदस्थ पवन सिंह ठाकुर संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ, रायपुर के जिलाध्यक्ष हैं।
दूसरे जितेंद्र सिन्हा अभनपुर विकासखंड के अध्यक्ष हैं और शासकीय प्राथमिक शाला झांकी में पदस्थ हैं। पंचायत एवं नगरीय निकाय शिक्षक संघ के आरंग विकासखंड अध्यक्ष हरीश दीवान शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल खमतराई में तैनात हैं। हाईस्कूल सतभावा में पदस्थ संदीप नागपुरे व हाईस्कूल सांकरा में पदस्थ गुरजीत सिंह भी बर्खास्त शिक्षाकर्मियों की सूची में शामिल हैं।
रायपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीलेश क्षीरसागर ने बताया, जिले के 959 शिक्षाकर्मियों को हड़ताल से वापस लौटने के लिए सोमवार तक की मोहलत दी गई है। इनमें अन्य जिलों से तबादला होकर आए 220 शिक्षाकर्मी और 2012 में हड़ताल के दौरान बर्खास्त होने के बाद बहाल हुए 739 शिक्षाकर्मी शामिल हैं।
जनप्रतिनिधियों-अभिभावकों से मांगा समर्थन
शिक्षाकर्मियों ने अपनी हड़ताल के छठवें दिन जनप्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और अभिभावकों से समर्थन मांगा है। राजधानी में शिक्षाकर्मी महापौर प्रमोद दुबे, देवांगन समाज, ब्रह्मण समाज और साहू समाज के पदाधिकारियों से मुलाकात की। वहीं शिक्षाकर्मियों ने अभिभावकों के नाम पत्र लिखकर समर्थन मांगा है।
कार्रवाई पर उठे सवाल
शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के बाद सरकार ने परिवीक्षा अवधि वाले और अन्य जिलों से तबादला लेकर शिक्षाकर्मियों को नोटिस जारी करने और बर्खास्त करने की बात कह रही थी। जबकि जिला पंचायत की ओर से जारी आदेश में करीब तीन शिक्षाकर्मी परिवीक्षा अवधि वाले नहीं हैं।
बर्खास्त शिक्षाकर्मी पवन सिंह ठाकुर का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार का नोटिस नहीं मिला था और उनकी परिवीक्षा अवधि भी समाप्त हो गई है।उन्होंने कहा हमारी लड़ाई सरकार की नीतियों के खिलाफ है। हम इसके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन का कहना है कि एक शिक्षाकर्मी वर्ग तीन का कर्मचारी है। उसे जनपद पंचायत बर्खास्त कर सकता है। जबकि जिला पंचायत ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।
शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के संयोजक वीरेन्द्र दुबे ने कहा, इस प्रकार की कार्रवाई से समस्या का हल नहीं निकलने वाले, बल्कि आंदोलन और उग्र होगा। सरकार को चाहिए कि बातचीत के माध्यम से इस समस्या का हल निकाले।
Published on:
26 Nov 2017, 12:52 PM IST
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