
Sunday Guest Editor: पेंड्रा-गौरेला-मरवाही जिले के कई गांवों में आज बच्चे सोशल मीडिया (Social Media) पर आने वाली खबरों की सत्यता परखने लगे हैं। वे फर्जी संदेशों और भ्रामक सूचनाओं को पहचानने की समझ विकसित कर चुके हैं। इस बदलाव के पीछे गरियाबंद निवासी रीना रामटेके और उनके संगठन नवनिर्माण चेतना मंच का लगातार किया गया जागरुकता अभियान है, जिसने बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों और महिलाओं को भी डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है।
रीना बताती हैं कि आज लगभग हर बच्चे के हाथ में मोबाइल (Mobile) है, लेकिन यह समझ होना जरूरी है कि इंटरनेट पर क्या देखना चाहिए, क्या नहीं और किस जानकारी पर भरोसा किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से उनकी टीम गांव-गांव जाकर बच्चों और अभिभावकों को सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग की जानकारी देती है।
प्रशिक्षण के दौरान फेसबुक (Facebook), एक्स (पूर्व ट्विटर), इंस्टाग्राम (Instagram) और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म के सही इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपीधोखाधड़ी और ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में विशेषज्ञों द्वारा व्यावहारिक जानकारी दी जाती है। इस अभियान का असर यह हुआ है कि क्षेत्र में साइबर ठगी के मामलों में कमी आई है और लोग किसी भी संदिग्ध संदेश पर तुरंत सतर्क हो जाते हैं।
महिलाओं को भी बनाया तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर: रीना का अभियान केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को मोबाइल बैंकिंग, केवाईसी (KYC), ऑनलाइन लेन-देन और डिजिटल सेवाओं का उपयोग करना भी सिखाया है। इसका परिणाम यह हुआ कि अब महिलाएं वन अधिकार समितियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, निर्णय लेने में आगे आ रही हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ स्वयं प्राप्त कर रही हैं। जो महिलाएं पहले मोबाइल चलाने में संकोच करती थीं, वे अब डिजिटल माध्यमों का आत्मविश्वास के साथ उपयोग कर रही हैं।
संघर्ष से मिली समाज सेवा की प्रेरणा: रीना बताती हैं कि पारिवारिक जमीन विवाद के कारण उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार हुआ था। उसी अनुभव ने उन्हें समाज में भेदभाव खत्म करने और लोगों को जागरूक बनाने का संकल्प दिया। आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने समाज सेवा का रास्ता चुना और आज डिजिटल साक्षरता (Digital Literacy) के माध्यम से गांवों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
संदेश: महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं। अवसर मिलने का इंतजार करने के बजाय उन्हें अपने लिए रास्ते स्वयं बनाने चाहिए। शिक्षा (Education), तकनीक और आत्मविश्वास ही सशक्त समाज की सबसे मजबूत नींव हैं। (रायपुर से सरिता दुबे की स्पेशल स्टोरी)