रायपुर

Supreme Court: DMF घोटाला मामले में पूर्व IAS अनिल टुटेजा को मिली जमानत, छत्तीसगढ़ आने पर लगी रोक

Anil Tuteja Bail: छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। टुटेजा छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और मामले से जुड़े किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

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May 18, 2026
Supreme Court
पूर्व IAS अनिल टुटेजा को मिली जमानत (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Supreme Court: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) घोटाला मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत प्रदान कर दी। हालांकि कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि टुटेजा फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य में प्रवेश नहीं करेंगे।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच में हुई। पूर्व आईएएस अधिकारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत का विरोध किया।

दो साल से ज्यादा समय से जेल में बंद

अनिल टुटेजा जनवरी 2024 से भ्रष्टाचार से जुड़े विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं। डीएमएफ घोटाला मामले में उन्हें फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद मंगलवार को उनकी रिहाई होने की संभावना है।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि टुटेजा को अन्य छह मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है और डीएमएफ केस आखिरी मामला है, जिसकी वजह से वे अब तक जेल में हैं। वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल रिटायर हो चुके हैं, इसलिए अब उनके द्वारा जांच या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना बेहद कम है।

राज्य सरकार ने किया कड़ा विरोध

राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि टुटेजा की भूमिका कई बड़े घोटालों में कथित रूप से “मुख्य साजिशकर्ता” की रही है। उन्होंने 2019 के कुछ कथित व्हाट्सएप चैट का भी हवाला दिया। हालांकि बचाव पक्ष ने इन आरोपों को मौजूदा डीएमएफ केस से असंबंधित बताया। कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है।

करीब 85 गवाहों से पूछताछ बाकी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में करीब 85 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है। ऐसे में ट्रायल जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं दिखती। कोर्ट ने माना कि आरोप गंभीर हैं और उन पर विधिवत ट्रायल होगा, लेकिन लंबे समय से हिरासत में रहने और ट्रायल में देरी को देखते हुए जमानत देना उचित है। बेंच ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान टुटेजा छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे और मामले से जुड़े किसी भी गवाह या सबूत को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।

कोर्ट में पेश हुआ 5 हजार पन्नों का पूरक चालान

इधर डीएमएफ घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एसीबी ने विशेष अदालत में दूसरा पूरक चालान भी पेश कर दिया है। यह चालान पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और सतपाल सिंह छाबड़ा के खिलाफ दायर किया गया। जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी ने करीब 5 हजार पन्नों का दस्तावेज अदालत में जमा किया है। इसमें वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजी प्रमाण, गवाहों के बयान और जांच से जुड़े कई अहम तथ्य शामिल हैं।

जांच एजेंसियां अब भी डीएमएफ फंड के उपयोग और कथित अनियमितताओं की गहराई से जांच कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

जानिए क्या है DMF घोटाला?

डीएमएफ यानी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए किया जाता है। आरोप है कि कोरबा समेत कई जिलों में डीएमएफ फंड से जुड़े टेंडरों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। जांच एजेंसियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भारी कमीशन लिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कई टेंडरों में राशि का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के तौर पर अधिकारियों तक पहुंचा। वहीं निजी कंपनियों से भी 15 से 20 प्रतिशत तक अवैध वसूली किए जाने के आरोप हैं।

ईडी की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120B और 420 के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में पूर्व आईएएस रानू साहू समेत कई अधिकारियों पर अपने पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं। छत्तीसगढ़ का यह डीएमएफ घोटाला राज्य के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में शामिल हो चुका है और इसकी जांच लगातार आगे बढ़ रही है।

कौन हैं अनिल टुटेजा?

अनिल टुटेजा छत्तीसगढ़ कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, जो राज्य प्रशासन में लंबे समय तक विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वे विशेष रूप से आबकारी विभाग और वित्तीय मामलों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के कारण चर्चा में रहे।

Updated on:
18 May 2026 03:10 pm
Published on:
18 May 2026 02:29 pm