
Bholanath Gupta Bail: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के चर्चित लाभांडी जमीन फर्जीवाड़ा मामले में आरोपी भोलानाथ गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने सशर्त राहत देते हुए निर्देश दिया है कि यदि भोलानाथ गुप्ता दो सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करता है, तो जमानत बांड प्रस्तुत करने के बाद उसे तत्काल नियमित जमानत पर रिहा किया जाए।
अदालत ने इस अवधि तक उसकी गिरफ्तारी पर भी रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की डिवीजन बेंच ने सुनाया। भोलानाथ गुप्ता ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर द्वारा वर्ष 2023 में पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि इसी मामले के सह-आरोपी हुबलाल गुप्ता उर्फ हब्बू को पहले ही सर्वोच्च अदालत से समान राहत मिल चुकी है। अदालत ने माना कि जब समान परिस्थितियों में सह-आरोपी को संरक्षण प्रदान किया गया है, तो वर्तमान याचिकाकर्ता को भी न्यायिक समानता के सिद्धांत के तहत राहत दी जा सकती है। इसी आधार पर कोर्ट ने भोलानाथ गुप्ता को सीमित अवधि के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करते हुए आत्मसमर्पण के बाद नियमित जमानत का लाभ देने का आदेश पारित किया।
यह मामला रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में दर्ज एक चर्चित भूमि फर्जीवाड़ा प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि लाभांडी क्षेत्र स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को फर्जी दस्तावेजों और जाली पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए बेचने की साजिश रची गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन के वास्तविक भू-स्वामी काशी प्रसाद चौधरी का निधन हो चुका था। इसके बावजूद उनके नाम पर कथित रूप से जाली दस्तावेज तैयार किए गए और संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि सह-आरोपी हुबलाल गुप्ता ने मृत भू-स्वामी का रूप धारण कर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित की। वहीं भोलानाथ गुप्ता पर आरोप है कि उसने उक्त दस्तावेज में गवाह के रूप में हस्ताक्षर कर सत्यापन किया और पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने में भूमिका निभाई।
इस मामले में दोनों आरोपियों ने पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि आरोपियों को पहले भी आत्मसमर्पण करने का अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि आरोपी कानून की प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहे हैं। इसी आधार पर उन्हें अग्रिम राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
हालांकि सर्वोच्च अदालत ने मामले के तथ्यों, उपलब्ध रिकॉर्ड और सह-आरोपी को मिली राहत को ध्यान में रखते हुए भोलानाथ गुप्ता को सीमित और सशर्त संरक्षण प्रदान किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह राहत स्थायी नहीं है और केवल निर्धारित शर्तों के पालन तक ही प्रभावी रहेगी। यदि याचिकाकर्ता तय समयसीमा के भीतर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित नहीं होता है, तो उसे मिली कानूनी सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी। ऐसी स्थिति में पुलिस को उसके खिलाफ कानून के अनुसार गिरफ्तारी और अन्य आवश्यक कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।
आरोपी को दो सप्ताह के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करना होगा।
आत्मसमर्पण के बाद जमानत बांड प्रस्तुत करने पर तत्काल नियमित जमानत दी जाएगी।
निर्धारित अवधि तक आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।
समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करने पर राहत स्वतः समाप्त हो जाएगी।
शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पुलिस को कार्रवाई करने की पूरी छूट होगी।
लाभांडी जमीन फर्जीवाड़ा मामला रायपुर के चर्चित भूमि विवादों में से एक माना जाता है। करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोपों के कारण यह मामला लंबे समय से चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आरोपी निर्धारित समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करता है या नहीं। फिलहाल सर्वोच्च अदालत के आदेश ने भोलानाथ गुप्ता को अस्थायी राहत जरूर दी है, लेकिन आगे की कानूनी प्रक्रिया उसके द्वारा कोर्ट की शर्तों का पालन करने पर निर्भर करेगी।