
ताबीर हुसैन @ रायपुर। आमतौर पर हम उनकी स्टोरी पढ़ते हैं या सुनते हैं जिन्होंने प्रॉब्लम को फेस किया और सफल हुए। आज हम ऐसे युवा की कहानी बता रहे हैं जिसे परेशानियों को देखते हुए उसका समाधान निकाला। कवर्धा के गांव धरमपुरा के वीरेंद्र चंद्रवंशी ने बिलासपुर के बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन से बीएससी ग्रेजएट हैं। चार साल की पढ़ाई दौरान उन्होंने महसूस किया कि स्टडी मटेरियल की कमी है। थर्ड ईयर से ही माइंड में यह चलने लगा कि ऐसा क्या किया जाए कि किसी एक प्लेटफॉर्म पर सिलेबस से रिलेटेड सारी जानकारी सरलता से मिल सके। तब आइडिया आया कि एक ऐप बनाया जा सकता है। इसके लिए बड़ी टीम की जरूरत थी। ऐप की तैयारी से लेकर लॉन्चिंग तक कई ऐसे मौके आए जब लगा कि यह मुश्किल काम है लेकिन कजिन कमलकांत चंद्रवंशी, बहनें वर्षा और स्वाति ने मॉरट सपोर्ट दिया।
पीएचडी पासआउट के लेक्चर वीडियो
वीरेंद्र बने बताया कि एग्रीकल्चर बेस्ड स्टडी के लिए यह देश का पहला ऐप है। नोट्सकल्चर में पीएचडी पासआउट एक्सपर्ट के वीडियो और ऑडियो लेक्चर के अलावा नोट्स डाउट सेशन, टॉपिक लेक्चर नोट्स, टेस्ट सीरीज अवलेबल होंगे। इन्हों मिलेगा फायदाऐप से उन्हें बेनिफिट मिलेगा जो बड़े शहरों में रहकर पढ़ाई नहीं कर सकते। आर्थिक दिक्कतों का सामना करने वाले छात्र भी इसका फायदा उठा सकते हैं। नेशनल लेवल के इस ऐप में 45 पीएचडी पासआउट और स्कॉलर स्टूडेंट शामिल हैं। टेक्नीकल टीम भी है। इस ऐप को हाल ही में इंदिरा गांधी कृषि विवि में आयोजित एक कार्यक्रम में वीसी एसके पाटिल ने लॉन्च किया है। इस ऐप में एग्रीकल्चर की पढ़ाई से जुड़ी हर जानकारी एवलेबल है।
टीम खड़ी करना आसान नहीं था
वीरेंद्र कहते हैं कि मैं जरा भी टेक्नीकल नहीं हूं। न ही मैंने किसी तरह का कोई एंटे्रंस एग्जाम दिया है। पढ़ाई के दौरान ही मैंने इस ऐप की प्लानिंग कर ली थी लेकिन इसके लिए टीम तैयार करना आसान नहीं था। अगर फैमिली का सपोर्ट नहीं होता तो ये काम मुमकिन नहीं था। मेरे पास प्लानिंग और आइडिया था लेकिन टीम नहीं। टीचर्स और टेक्नीकल लोगों को कन्वेंस करना और उन्हें ई लर्निंग ऐप का हिस्सा बनाना बहुत बड़ी चुनौती थी। पिता अर्जुन चंद्रवंशी फॉर्मर हैं और मॉम सुशीला चंद्रवंशी होम मेकर।