
Chhattisgarh News: प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। रायपुर और बेमेतरा जिलों के दो अलग-अलग स्कूलों में जर्जर व्यवस्था के कारण तीन छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इन हादसों ने स्कूल भवनों की बदहाली और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर दिया है। रायपुर के माना स्थित राय पब्लिक स्कूल में शनिवार को प्रार्थना के बाद एक बड़ा हादसा हो गया।
चौथी कक्षा में पढ़ाई के दौरान अचानक सीलिंग फैन टूटकर गिर गया, जिससे छात्र लक्ष्य पॉल को गंभीर चोटें आईं। घायल बच्चे के सिर और शरीर पर गंभीर घाव के कारण 4 टांके लगाने पड़े। परिजनों का आरोप है कि स्कूल की छत पक्की नहीं है, बल्कि पुरानी और जर्जर सीमेंट की चादरों (शेड) से बनी है। छत पर टंगा पंखा भी पुराना और जंग लगा हुआ था।
परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद बच्चे को किसी अच्छे डॉक्टर या पास के सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय महज एक स्थानीय क्लिनिक में प्राथमिक उपचार कराकर औपचारिकता पूरी कर ली गई। मामले में रायपुर डीईओ एस. सतीश ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है, वे जांच कराएंगे।
रायपुर में 134 जर्जर भवन: राजधानी जिले में ही 134 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं। इनमें धरसींवा ब्लॉक में 130, तिल्दा में 120, आरंग में 100 और अभनपुर में 40 से अधिक भवन डिस्मेंटल (तोड़ने) योग्य हैं।
'मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना (2022-23)' के तहत स्कूलों की मरम्मत में हुई गड़बड़ियों की जांच रिपोर्ट दो साल बाद भी सामने नहीं आई है। योजना के तहत स्वीकृत 25 हजार कार्यों में से 4700 से अधिक कार्यों को रोक दिया गया था, जिससे सुधार कार्य अधर में लटका हुआ है।
दूसरी घटना बेमेतरा जिले के साजा विधानसभा अंतर्गत ग्राम गुवारा के शासकीय स्कूल की है। सोमवार को कक्षा में पढ़ाई के दौरान जर्जर छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर गिर गया। मलबे की चपेट में आने से पारस और प्रवेश नामक दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
शिक्षकों ने आनन-फानन में दोनों को थान खमरिया अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। वर्तमान में बच्चों का सीटी स्कैन कराया जा रहा है। बीईओ टीजी पात्रा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि उस जर्जर कक्ष को सील कर दिया गया है।