
Cyber Fraud: @ नारद योगी। अधिकांश कंपनियों के कर्मचारी ऑफिस में वाट्सऐप का इस्तेमाल अपने डेस्कटॉप या कम्प्यूटर में करते हैं। इससे हैकिंग का खतरा ज्यादा है। साइबर ठगों ने तेलीबांधा, टिकरापारा और खम्हारडीह में जिन अकाउंटेंट को टारगेट किया था, वे तीनों अपने डेस्कटॉप कंप्यूटर पर वाट्सऐप का इस्तेमाल करते हैं। इसी के जरिए साइबर ठगों ने हैक किया फिर उनके वाट्सऐप के विभिन्न ग्रुपों में घुसपैठ किया। इससे उन्हें उनकी कंपनी के महत्वपूर्ण अधिकारियों और उनसे हुई चैटिंग भी मिल गई। इसके बाद इन्हीं जानकारियों की मदद से तीनों अकाउंटेंट को आसानी से ठग लिया। इसी पैटर्न से तेलीबांधा थाने में 2 करोड़, टिकरापारा थाने में 88 लाख और खम्हारडीह थाने में 20 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज हुआ है।
डेस्कटॉप या लैपटॉप के जरिए हैकिंग आसानी से हो जाती है। इसमें कई वेबसाइट, फाइल, वीडियो, फोटो आदि चेक करते रहते हैं। इस कारण साइबर ठग इनका ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर ठग सबसे पहले छोटे कर्मचारियों या निजी कामगारों को मैलवेयर, फर्जी लिंक या लुभावने ऑफर्स के जरिए फंसाकर उनके डेस्कटॉप या मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल करते हैं।
साइबर ठग आमतौर पर कॉन्टेक्ट लिस्ट में मालिक, बड़े कारोबारियों, सप्लायरों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े लोगों के नाम और नंबर तलाशते हैं। लेन-देन की चैटिंग भी ढूंढते हैं। इसके बाद अकाउंटेंट जैसे निचले स्तर के कर्मचारी को उनके नाम और डीपी लगाकर वाट्सऐप मैसेज करते हैं।
-डेस्कटॉप पर वाट्सऐप चलाने के लिए अक्सर ब्राउज़र में क्यूआर कोड स्कैन करना पड़ता है। कई बार लोग सर्च इंजन या विज्ञापनों में दिखने वाले मिलते-जुलते नकली लिंक पर क्लिक कर बैठते हैं, जो बिल्कुल असली वाट्सऐप वेब जैसे दिखते हैं। ऐसे फर्जी पेजों पर क्यूआर कोड स्कैन करने से पूरा अकाउंट साइबर ठगों के कंट्रोल में चला जाता है।
-किसी साइबर कैफे, ऑफिस या किसी दूसरे के कम्प्यूटर पर वाट्सऐप लॉगिन किया और इस्तेमाल के बाद लॉग आउट करना भूल गए, तो दूसरा व्यक्ति आपके अकाउंट का पूरा एक्सेस पा सकता है। फिर इसका दुरुपयोग कर सकता है।
-ऑफिस, कॉफ़ी शॉप या ट्रेन पर डेस्कटॉप की बड़ी स्क्रीन पर चैट खुली होने पर आसपास बैठे लोग आपकी निजी जानकारी, बैंक डीटेल्स या पासवर्ड आसानी से देख सकते हैं।
-कंप्यूटर के जरिए वाट्सऐप पर मिलने वाली संदिग्ध फाइल्स (जैसे .exe या फर्जी पीडीएफ/APK) को डाउनलोड और ओपन करना खतरनाक हो सकता है। इससे पूरे सिस्टम में मैलवेयर आ सकता है, जो आपकी पर्सनल और बैंकिंग जानकारी चुरा सकता है।
-कंप्यूटर की बड़ी स्क्रीन पर काम करते वक्त कई बार लोग चैटिंग में जल्दी बाजी में रहते हैं। ठग इसका फायदा उठाकर बैंक अधिकारी, रिश्तेदार या कंपनी का बॉस बनकर फर्जी यूपीआई लिंक, लॉटरी या जॉब के नाम पर आसानी से ठगी का शिकार बना लेते हैं।
-कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों को अनजान लिंक्स, ऐप्स या संदिग्ध फाइलों को डाउनलोड करने से बचना चाहिए।
-फोन और सभी महत्वपूर्ण व्यावसायिक खातों पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और मजबूत पिन/पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए।
-यदि किसी कर्मचारी के नंबर से पैसों की मांग या वित्तीय निर्देश वाला कोई संदेश मिले, तो बिना फोन कॉल या आमने-सामने पुष्टि किए कोई भी बड़ा ट्रांजेक्शन न करें
-समय-समय पर अपने कार्यालय के सभी जुड़े उपकरणों और फोन की एंटीवायरस स्कैनिंग कराते रहना चाहिए।