Women’s Day 2026: पति और पत्नी में किसी को बनना था फोरेंसिक मेडिसिन एक्सपर्ट, इसलिए महिला होकर भी कर रहीं बखूबी पोस्टमार्टम का काम
Women’s Day 2026: पीलूराम साहू. प्रदेश की एकमात्र महिला फोरेंसिक मेडिसिन व टॉक्सिकोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. स्निग्धा जैन का कहना है कि पति या पत्नी में किसी एक को फोरेंसिक विशेषज्ञ बनना था इसलिए वे काम बखूबी कर रही हैं। अब तक 3000 से ज्यादा पोस्टमार्टम कर चुकीं स्निग्धा का कहना है कि फोरेंसिक मेडिसिन एक चैलेंजिंग, ऑफ बीट व डायनेमिक सब्जेक्ट है।
यह मृतात्मा का मोक्ष द्वार है। कोई भी क्रिमिनल फोरेंसिक एक्सपर्ट की सही रिपोर्ट से सजा से नहीं बच सकता। यह लॉ से जुड़ा सब्जेक्ट है इसलिए हम किसी मरीज का इलाज नहीं कर भी समाज के लिए काफी कुछ अच्छा कर पा रही हैं। विश्व महिला दिवस 8 मार्च को है। इस मौके पर पत्रिका ने प्रदेश के सबसे बड़े व पुराने पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक मेडिसिन व टॉक्सिकोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. स्निग्धा से विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की।
प्रदेश ही नहीं देश में भी ऐसी महिला डॉक्टरों की संख्या काफी कम है, जो पोस्टमार्टम कर रही हैं। वे प्रदेश की एकमात्र फोरेंसिक मेडिसिन है, जो बखूबी अपना काम कर रही हैं। पत्रिका के सवाल पर कि महिला होकर भी पोस्टमार्टम वाले सब्जेक्ट को क्यों चुना, के सवाल पर कहती हैं कि उनके पति ने एम्स दिल्ली में एमडी फोरेंसिक मेडिसिन ज्वाइन कर लिया था, लेकिन एमडी मेडिसिन मिलने फोरेंसिक विषय छोड़ दिया और डीएम कार्डियोलॉजी कर कार्डियोलॉजिस्ट बन गए। इसलिए उन्होंने फोरेंसिक विषय को चुनकर मृतात्मा के साथ न्याय करने की सोची और फोरेंसिक मेडिसन एक्सपर्ट बन गईं।
नेहरू मेडिकल कॉलेज में तीन साल पहले ही एमडी फोरेंसिक मेडिसिन विषय में पीजी कोर्स शुरू हुआ है। इसमें एमडी की 5 सीटें हैं। पिछले तीन साल से 4 छात्राओं ने एडमिशन लिया है। चूंकि विभाग की एचओडी महिला है इसलिए छात्राओं ने फोरेंसिक विषय चुना है। इसके पहले सिम्स बिलासपुर में फोरेंसिक में एमडी की सीट थी, लेकिन किसी छात्रा ने एडमिशन नहीं लिया। 2000 में कटक से एमबीबीएस व 2014 में एमडी फोरेंसिक मेडिसिन करने वाली डॉ. स्निग्धा का कहना है कि उनके काम पर उनके पति व बच्चों को भी गर्व है। किसी ने आज तक नहीं टोका कि पत्नी या मम्मी पोस्टमार्टम करती हैं।
पत्रिका से बातचीत में डॉ. स्निग्धा ने कहा कि उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाने का कोई दुख नहीं है। चाहे तो वे पीजी में दूसरे विषय लेकर ये काम आसानी से कर सकती थी, लेकिन उन्हें कुछ चैलेंजिंग काम करना था इसलिए फोरेंसिक को चुना। हालांकि शुरूआत में कुछ लोगों को उनका यह सब्जेक्ट लेना बुरा लगा, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट पति का पूरा सपोर्ट मिला। वे अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट हैं और उनका ये भी कहना है कि महिला डॉक्टर के लिए भी फोरेंसिक विषय चुनना गर्व का विषय हो सकता है।