
कौशल्या साय (photo source- Patrika)
@देवेंद्र गोस्वामी/Women's Day 2026: कौशल्या साय का मानना है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं मेहनती और आत्मसम्मानी होती हैं। उन्हें शिक्षा, कौशल और आर्थिक अवसरों से जोड़कर ही सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि समाज के उज्ज्वल भविष्य की शक्ति है।
प्रश्न . छत्तीसगढ़ की महिलाओं को किस तरह सशक्त किया जाए?
उत्तर : छत्तीसगढ़ की महिलाएं मेहनती, आत्मसम्मानी और संघर्षशील होती हैं। उन्हें सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी तरीका है.. उन्हें शिक्षा, कौशल और आर्थिक अवसरों से जोडऩा। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है और पूरा परिवार तथा समाज मजबूत होता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, बिहान योजना, महतारी वंदन योजना और विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ रही है। इससे महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं निभा रहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। मेरा मानना है कि नारी सशक्तीकरण केवल एक योजना नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव का एक व्यापक आंदोलन है।
प्रश्न . जशपुर की महिलाओं के साथ मिलकर जिस तरह आपने जशप्योर ब्रांड बनाया और यहां बने उत्पादों की मांग देशभर में हो रही है, वैसा ही बस्तर और अन्य क्षेत्रों में करने की कोई योजना है?
उत्तर : जशप्योर केवल एक ब्रांड नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और पहचान का प्रतीक है। जब स्थानीय उत्पादों को सही प्रशिक्षण, गुणवत्ता और बाजार मिलता है तो वे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकते हैं। जशपुर में महिलाओं ने महुआ, मिलेट्स और स्थानीय उत्पादों से जो काम शुरू किया, वह आज एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा है कि इसी तरह बस्तर, सरगुजा और अन्य वनांचल क्षेत्रों में भी स्थानीय संसाधनों पर आधारित महिला उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। महुआ, कोदो-कुटकी, वन उत्पाद, हस्तशिल्प और बांस से बने उत्पादों को संगठित कर महिलाओं के लिए बड़े आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं। हमारा प्रयास है कि गांव की महिलाएं भी उद्यमी बनें और अपने उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाएं।
प्रश्न . बस्तर में एक पंचायत में बेटी के जन्म पर 2100 रुपए की मदद की जाती है। बेटियों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए किस तरह के प्रयास होने चाहिए?
उत्तर : बेटी का जन्म उत्सव का विषय होना चाहिए। समाज में यह संदेश जाना चाहिए कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की शक्ति है। बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बेटियों की शिक्षा, पोषण और सुरक्षा से जुड़े कई कार्यक्रमों पर लगातार काम कर रही है। परिवार, समाज और प्रशासन: सभी की जिम्मेदारी है कि बेटियों को सुरक्षित वातावरण और आगे बढऩे के अवसर मिलें। जब समाज बेटियों को सम्मान देगा, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।
प्रश्न . ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
उत्तर : ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं में अपार क्षमता है, लेकिन कई बार उन्हें अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, बाजार से जुड़ाव और कौशल प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में अभी और काम करने की जरूरत है। राज्य सरकार स्व-सहायता समूहों, बिहान मिशन और विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोडऩे का काम कर रही है। इससे महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं।
प्रश्न . राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए समाज और राजनीतिक दलों को किस तरह के प्रयास करने चाहिए?
उत्तर : लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब उसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। समाज को महिलाओं को नेतृत्व की भूमिका में देखने की सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी। पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह दिखाती है कि अगर अवसर मिले तो महिलाएं उत्कृष्ट नेतृत्व दे सकती हैं। राजनीतिक दलों और समाज दोनों को महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए।
प्रश्न . आपके जीवन में कौन सी महिला रही, जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रेरित किया?
उत्तर : मेरे जीवन में मेरी मां मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और त्याग की मिसाल रहा है। उन्होंने हमेशा सिखाया कि कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। उनके संस्कार और मार्गदर्शन ने मुझे जीवन के हर मोड़ पर आगे बढ़ने की शक्ति दी।
प्रश्न . सरकार और समाज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए क्या बेहतर कर सकते हैं?
उत्तर : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा, कौशल विकास, वित्तीय सहायता और बाजार से जुड़ाव बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्यम, कृषि आधारित गतिविधियों और आजीविका मिशन से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है। जब सरकार की योजनाएं और समाज का सहयोग साथ आता है, तब महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।
प्रश्न . महिला दिवस पर छत्तीसगढ़ की बेटियों और माताओं-बहनों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
उत्तर –अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सभी बेटियों और माताओं-बहनों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। आप सभी में अपार शक्ति, प्रतिभा और क्षमता है। अपने सपनों पर विश्वास रखें और निरंतर आगे बढ़ते रहें। जब नारी आगे बढ़ती है तो परिवार, समाज और पूरा राज्य आगे बढ़ता है।
Updated on:
08 Mar 2026 01:08 pm
Published on:
08 Mar 2026 12:52 pm
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