
रायसेन। शहर सहित जिले के सभी सरकारी विभागों में पदस्थ 1060 संविदा कर्मचारियों की यूनिक आईडी बनाई जाएगी। इसके बाद ही संबंधित संविदा कर्मचारियों को वेतन मिलेगा। जिला कोषालय विभाग के अधिकारी ने जिले के सभी डीडीओ को इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत करवा दिया गया है। इस पत्र में इस बात का जिक्र है कि आगामी 30 अप्रैल तक यूनिक आईडी अनिवार्य रूप से करवा लें।
जिला कोषालय अधिकारी के सूत्रों के अनुसार संचालनालय कोष एवं लेखा भोपाल द्वारा 1 अप्रैल को आदेश जारी हो चुका है।सरकारी दफ्तरों में कार्यरत सभी रायसेन 1650 संविदा कर्मचारियों की यूनिक आर्ईडी बनाना है। जिला पंचायत में 150 से अधिक संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं।
यह कोर्ड अंग्रेजी के सी अक्षर से प्रारंभ होगा। आगामी जून महीने से इन सभी 1650 संविदा कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सिर्फ ऑनलाइन जनरेट किए जाएंगे। अब भौतिक रूप से इनके वेतन देयक भुगतान के लिए स्वीकार्य नहीं होंगे। हम यहां बता दें कि अभी तक संविदा कर्मचारियों के वेतन के लिए मैनुअल बिल कोषालय में लगाए जा रहे हैं। कुछ विभाग संविदा कर्मचारियों की आड़ में प्रायवेट कर्मचारियों के भी वेतन का भुगतान करवा रहे हैं। यूनिक आईडी बनने से वेतन के भुगतान में निश्चित रूप से पारदार्शिता आ जाएगी।
पहली बार:आईएफएमआईएस सॉफ्ट वेयर से निर्धारित होकर कर्मचारियों को मिलेगा एरियर
सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन निर्धारण के लिए 1 जनवरी 2016 से 30 जून 2017 तक के वेतन एरियर की गणना एवं भुगतान के लिए बिल जनरेट की सुविधा आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर के पे-रोल मॉड्यूल में उपलब्ध है। इसमें 1 जनवरी 2016 से निर्धारित किए गए वेतन के अनुसार बिल राशि दर्ज होकर स्वत:प्रदर्शित होगी। ऑनलाइन जनरेटेड किए गए सभी भुगतान स्वत: ही दिखाई देंगे।
इस अवधि के लिए सभी भौतिक देयकों द्वारा किए गएभुगतान का विवरण डीडीओ के लॉगइन करने पर कर्मचार वार कोड दर्ज करते हुए यह काम 30 अप्रैल 2018 तक पूरा करना है कि ताकि 1 मई 2018 से किए जाने वाले वेतन, एरियर के भुगतान में किसी भी प्रकार की बाधा ना आए।
आईडी जनरेट नहीं की तो रूकेगा अधिकारियों का वेतन...
सभी डीडीओ को 30 अप्रैल तक अपने कार्यालय में पदस्थ सभी संविदा कर्मियों के यूनिक आईडी जनरेट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि इनका वेतन भुगतान में कोई असुविधा ना हो। संचालनालय कोष भोपाल से जारी निर्देशों के पालन में किसी भी तरह से देरी पर कार्यालय प्रमुख का वेतन रोका जा सकता है।