
राजगढ़। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने सरदार बल्लभभाई पटेल निशुल्क दवा वितरण केन्द्रों की शुरूआत की। लेकिन प्रबंधन की अनदेखी के कारण यह व्यवस्थाएं खोखली होती जा रही है। मामला जिला चिकित्सालय का है। जहां दवा वितरण केन्द्र ड्रग एक्ट के नियमों को पूरा नहीं कर रहा और लगातार वहीं से मरीजों को दवा का वितरण किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि इसको लेकर कभी आवाज न उठी हो। लेकिन कर्मचारियों द्वारा उठाई गई इस आवाज को वहीं दबा दिया गया। ऐसे में पिछले चार सालों से जिला चिकित्सालय का दवा वितरण केन्द्र टीनशेड के नीचे चल रहा है। जिसके अंदर का तापमान वर्तमान में ४० से अधिक रहता है। जबकि अधिकांश मेडीसीन को अधिकतम ३० डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान में नहीं रख सकते। इसके बावजूद दिया तले अंधेरा पसरा हुआ है।
जिला चिकित्सालय में दवा वितरण का काम ओपीडी के सामने से किया जाता है। यह केन्द्र टीनशेड के नीचे चल रहा है। इन दिनों राजगढ़ का तापमान ४५-४६ के बीच है। ऐसे में यदि केन्द्र के अंदर की बात करे तो वहां भी ४० से अधिक तापमान रहता है। लेकिन कोई भी मरीजों को लेकर गंभीर नजर नहीं आता। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ड्रग विभाग की टीम पूरे जिले में निरीक्षण करती रहती है और उसे राजगढ़ की ही हालात का पता नहीं।
इन दवाओं पर हो रहा असर-
-सायरप-पेरासिटामाल, ओफ्लाक्सासिन, मेट्रोजिन के साथ कप सिरप पर भी अधिक तापमान का असर पड़ता है।
-आंख और कान की दवाईयों में सिप्रोफ्लाक्सासिन, ओफ्लाक्सासिन, आई ड्राप और आई आइंटमेंट।
-ओआरएस पाउडर, पोवेडिन, आयोडिन, डायक्लोफेनिक, आइंटमेंट के साथ ब्लड प्रेशर और शुगर की अधिकांश दवाईयों को २५ डिग्री तापमान पर रखना जरूरी है।
पानी के लिए भी तरसते मरीज-
जिला चिकित्सालय में इन दिनों पानी की समस्या भी बनी हुई है। जहां कभी ट्रामा सेंटर में तो कभी पुराने अस्पताल में लोग पानी के लिए भटकते रहते है। शुक्रवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब ओपीडी के सामने और महिला वार्ड के पास लगे वाटर कूलर में पानी नहीं था।
मेडिसीन के लिए अधिकतम ३० डिग्री का तापमान होना चाहिए। यदि वहां पर टीनशेड है तो गर्मी तो अधिक होगी। दवा वितरण केन्द्र को लेकर सीएमएचओ मेडम से चर्चा करेंगे या तो उसे बदला जाए या फिर वहां थर्माकोल या प्लाई की सीट लगे।
बीएस कुशवाह, ड्रग इंस्पेक्टर राजगढ़