शासन फीस नहीं देती इसलिए अब नहीं दूंगा निशुल्क प्रवेश
राजगढ़. अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत शासन ने प्रत्येक निजी विद्यालय में पच्चीस प्रतिशत प्रवेश निशुल्क दिए जाने की व्यवस्था लागू की है। इस योजना में उन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है जिनके पालक बीपीएल सूची में शामिल है, लेकिन स्कूल प्रबंधन की मनमानी और उस पर अधिकारियों की अनदेखी के चलते स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश लेने वाले बच्चों को और उनके पालकों को हर साल परेशान होना पड़ता है। ऐसा ही एक मामले की शिकायत मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में पहुंची।
इसमें ब्यावरा जिले से आए दिनेश सोनी ने बताया कि शहर में संचालित प्रोगे्रसिव किड़्स स्कूल में तीन वर्ष पूर्व उनकी बच्ची को आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश दिलाया गया था। इस साल स्कूल संचालक ने शासन से निशुल्क बच्चों की फीस समय से नहीं मिलने की बात करते हुए बालिका को अगली कक्षा में प्रवेश देने से साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं बालिका के पालकों ने इसकी शिकायत बीआरसी से तो जिनकी बात भी स्कूल संचालक ने अनसूनी कर दी। बालिका के परिजनों की स्थिति ऐसी नहीं है की वे फीस देकर बच्चीं को अन्य स्कूल में प्रवेश दिला सके। वहीं चौथे साल में अन्य स्कूल में प्रवेश में भी समस्या आ रही है। ऐेसे में थक हार कर मंगलवार को वह जिलास्तरीय जनसुनवाई में पहुंचा, लेकिन यहां भी मौजूद अधिकारियों ने उसका आवेदन लेकर रख लिया।
दो वर्ष पूर्व स्कूल संचालक ने भोपाल कार्यालय से अनुमति लेकर स्कूल का नाम और अपनी प्रथम कक्षा को बदल दिया था। ऐसे में वो पूर्व में प्रवेश लेने वाले बच्चों की फीस नहीं आई। यहीं कारण है कि स्कूल संचालक बच्चीं को प्रवेश देने से मना कर रहा है। इस प्रकरण की पूरी जानकारी जिला कार्यालय को दे दी है, वहीं से इस संबंध में कार्रवाई की जा रही है।
ओपी नामदेव, बीआरसी ब्यावरा