
राजगढ़। गुरूवार सुबह पांच बजे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदित नारायण सक्सेना का निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। जिसके कारण आज सुबह 5 बजे उनका निधन हो गया।
बताया जा रहा है कि लंबी उम्र के चलते सक्सेना जी पिछले कई दिनों से बीमार थे। धीरे धीरे उन्हें कई सारी बीमारियां पकड़ती जा रही थी। परिवार के लोगों द्वारा पास ही के निजी अस्पाल में उनका इलाज चल रहा था। पर, होनी को कौन रोक सकता है।
रात को सोए तो सुबह उठे ही नहीं
परिवार वालों का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदित नारायण जी रात को हमसे बात करके सोए थे। कल रात को सोने तक उन्हें देखकर लगा ही नहीं कि कुछ ऐसा हो सकता है। हर रोज वे सुबह जल्दी उठते हैं। पर, आज वे नहीं उठे। हम उठाने गए तो उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया। बहुत देर कोशिश करने के बाद हमने डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने चैकअप किया और बताया कि अब वे इस दुनिया में नहीं रहे। हमारे तो पैरों से जमीन खिसक गई। काश हम रात को उनके पास से जाते ही नहीं। पूरी रात उनके साथ होते, तो ऐसा होता ही नहीं।
बच्चों के सर से चला गया बुजुर्गो का आर्शीवाद
परिवार वालों का कहना है कि घर में मौजूद छोटे बच्चों को तो इस बात की अभी तक कोई जानकारी नहीं है कि उनके दादा, नाना के साथ क्या हुआ है। जब उन्हें पता चलेगा तो उन पर क्या गुजरेगी। कौन उन्हें आजादी की कहानियां सुनाएगा। कौन उनमें देश के लिए कुछ कर गुजरने का उत्साह भरेगा। बच्चों के सर से तो बुजुर्गो का आर्शीवाद चला गया।
देश ने खोया एक और स्वतंत्रता सेनानी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदित नारायण सक्सेना ने देश के लिए कई काम किए। उन्होंने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिसके चलते हम उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदित नारायण सक्सेना कहते हैं। उनका द्वारा किए गए कार्य सराहनीय हैं।