
Rajgarh Bribery Case: मध्यप्रदेश के राजगढ़ में बुधवार को कलेक्टर के चैम्बर के ठीक नीचे बैठने वाले नायब तहसीलदार के बाबू द्वारा रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। बुधवार को जमानत के पहुंचे एक पक्षकार से नायब तहसीलदार के कहने पर बाबू ने तीन हजार रुपए ले ले लिए। ये आरोप पक्षकार के वकील और उनके अन्य साथियों ने लगाए हैं। रिश्वत के विरोध में दोपहर में सभी वकील कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के चैम्बर के बाहर हंगामा कर दिया।
कलेक्टर के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में होने के कारण वकीलों को अपर कलेक्टर के समक्ष भेजा गया। अपर कलेक्टर प्रतापसिंह चौहान के चैम्बर में हंगामा करते हुए वकीलों ने कहा कि यह सरेआम मनमानी है। इस पर अंकुश बेहद जरूरी है और कार्रवाई की जाए। इससे पहले सभी अधिवक्ता संबंधित बाबू के पास भी पहुंचे थे और कहा था कि आप हमें रुपए चेक करवा दो हम मान जाएंगे। उन्होंने यहां तक दावा किया कि तीन हजार की कुल रिश्वत में 500-500 के पांच और 100-100 के पांच नोट लिए गए। इस पर बाबू ने कहा कि मैं क्यों जेब चेक करवाऊं, मेरे पास अन्य रुपए भी हैं। ऐसे काफी देर तक गहमा-गहमी बनीं रही। बाद में जब अपर कलेक्टर के समक्ष भी वकीलों और बार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अविनाश दशेरिया ने रिश्वतखोरी के आरोप लगाए और सुधार न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
धारा-151 के तहत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए गिरधारी तंवर निवासी देवरी मंदर, तहसील अकलेरा (झालावाड़) की जमानत के मामले में रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, गिरधारी के दामाद सांवरिया निवासी देवलीबढ़ की जमानत के लिए अधिवक्ता संदीप सरावत को नियुक्त किया गया था। जमानत की कार्रवाई के दौरान नायब तहसीलदार कार्यालय के बाबू राहुल ने कथित तौर पर 3 हजार रुपए लिए। आरोप है कि जमानत स्वीकार होने के बाद न्यायालय में मौजूद अन्य अधिवक्ताओं ने रुपए देने से इनकार किया तो उनकी जमानत देने से मना कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने अधिवक्ताओं के साथ मिलकर शिकायत की है। पांच हजार रुपए एक अन्य मामले में रिश्वत मांगने के आरोप लगाए हैं।
जानकारी के अनुसार हंगामा शांत होने के कुछ देर बाद दोबारा पक्षकार और वकीलों को बुलाया गया और संबंधित बाबू ने बंद कमरे में रिश्वत में लिए हुए तीन हजार रुपए उन्हें लौटा दिए। कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने इस पूरे मामले पर कहा है कि मामला बेहद गंभीर है और यदि सही है तो गलत भी है। हमने जांच बैठा दी है। जांच में यदि गलत पाए जाते हैं तो दोनों को हटाने के निर्देश दिए हैं। तत्काल प्रभाव से यह कार्रवाई की जाएगी।