
Rajgarh Milk Protest: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में दूध की कीमतें बढ़ाने की मांग को लेकर जीरापुर और माचलपुर से शुरू हुआ दुग्ध उत्पादकों का आंदोलन बुधवार को जिला मुख्यालय तक पहुंच गया। सुबह से ही राजगढ़ शहर में दूध की सप्लाई प्रभावित रही। गांवों से दूध लेकर पहुंचे दूधियारों को दुग्ध उत्पादक संघ के पदाधिकारियों ने रोक दिया। कुछ दूध जब्त किया गया तो कुछ जगह दूध बहाने की भी बात सामने आई। दूध लेकर आने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया। इससे आम लोगों की परेशानी बढ़ गई। सुबह से डेयरियों पर दूध का इंतजार कर रहे कई लोगों को बैरंग लौटना पड़ा। घरों में सप्लाई होने वाला दूध भी नहीं पहुंचा।
खुजनेर रोड पर गांव से दूध लेकर आए कुछ दूधियारों को रोककर दूध जब्त किया गया। वहीं सांची पार्लर सहित अन्य पैक्ड दूध की सप्लाई भी नहीं होने दी गई। सांची, अमूल, प्रभात, सौरभ और श्रीधी सहित अन्य कंपनियों के पैकिंग वाले दूध की उपलब्धता भी प्रभावित रही। इससे सुबह दूध लेने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। चोरी छिपे दूध पहुंचाने वालों पर भी संघ ने जुर्माना लगाया। संघ ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में हड़ताल जारी रहेगी, जब तक मांगें मांग नहीं ली जातीं हड़ताल रहेगी।
हड़ताल के बीच डिप्टी कलेक्टर निधि भारद्वाज, एसडीओपी अरविंद सिंह, कोतवाली टीआई मंजू मखेनिया और शासकीय डेयरी संचालक ने दुग्ध उत्पादक संघ के पदाधिकारियों और किसानों से चर्चा की। अधिकारियों ने किसानों से मांगें रखने और हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया तथा उनकी बात आगे पहुंचाने का भरोसा दिया। किसानों ने दूध का भाव 12 रुपए प्रति फैट करने, भैंस का दूध 100 रुपए और गाय का दूध 80 रुपए लीटर करने तथा दूध की खरीदी खुदरा स्तर पर करने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि सरकारी और सांची केंद्रों पर उन्हें वर्तमान में 8.70 रुपए प्रति फैट मिल रहा है, जो उनकी मांग के अनुसार पर्याप्त नहीं है।
माचलपुर में दूध की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर चल रही हड़ताल चौथे दिन समाप्त हो गई। दुग्ध उत्पादक संघ, दूध डेयरी संचालकों और दूध विक्रेताओं ने मिलकर फैट का भाव 9 से बढ़ाकर 10 रुपए करने का निर्णय लिया। इसके साथ 50 रुपए लीटर बिकने वाला दूध अब 60 रुपए और 60 रुपए वाला दूध 70 रुपए लीटर में मिलेगा। बताया गया कि क्षेत्र में आमजन की परेशानी को देखते हुए सभी दूध समितियों, डेयरी संचालकों और विक्रेताओं ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया है। इसमें प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं हुआ। पांच दिन से दूध की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।