
(राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा की रिपोर्ट)
Panchayat Sachiv demands bribe from Dalit Sarpanch: मध्य प्रदेश में अगले साल निकाय-पंचायत चुनाव होने वाले हैं और ग्राम पंचायतों के भ्रष्टाचार के किस्से अभी से उजागर होने लगे हैं। पंचायतों में सचिव, जीआरएस की मनमानी का आलम यह है कि कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं हो रहे। कई जगह सरपंच इसमें शामिल होते हैं लेकिन कई जगह दलित संरपचों पर दबाव बनाया जा रहा है। कुछ उदाहरण ऐसे हैं जहां पंचायतों को ठेके पर ले रखा है।
ताजा मामला राजगढ़ जिले के ब्यावरा जनपद की ग्राम पंचायत परसूलिया का सामने आया है। यहां के दलित सरपंच पर सचिव इस तरह से दबाव बना रहा है कि जनता से जुड़े विकास कार्यों पर भी हस्ताक्षर नहीं कर रहा। अनुसूचित जाति वर्ग के सरपंच पप्पू मेहतर ने परेशान होकर अपनी ही पंचायत के सचिव की शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिव प्रशांत शर्मा गुना से आते हैं, आधे समय पंचायत में नहीं बैठते, लोग शिकायतें लेकर मेरे पास आते हैं।
साथ ही पंचायत से जुड़े विकास कार्यों की फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं करते। सीसी रोड, पैबर्स ब्लॉक और श्मशान की फाइल को अप्रुव करने के नाम पर 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई। नहीं देने पर सचिव ने पूरे सालभर का रोना रो दिया कि सब सरपंच सचिवों का ध्यान रखते हैं, आप नहीं रखते। सरपंच पप्पू ने वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ जिला पंचायत सीईओ से लिखित शिकायत की है।
पंचायत सचिव प्रशांत शर्मा और सरपंच पप्पू मेहतर के बीच हुए संवाद की एक ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल (Bribery audio viral) हो रहा है। जिसमें सचिव फाइल पास करवाने के लिए सरपंच से 20 हजार रुपए मांगता सुनाई दे रहा है। प्रस्तुत है वायरल ऑडियो में हुई बातची के कुछ अंश।
सरपंच : सचिव साहब फाइल पर हस्ताक्षर कर दीजिए।
सचिव : मेरा कैसा क्या करोगे, 20 हजार रुपए करवा देना, 2.60 लाख का कुआं है न इतना करना पड़ेगा।
सरपंच- अरे सर यह तो पुराना ही काम है इसमें तो थोड़ा देख लीजिए?
सचिव : आप भी तो देखो सरपंच जी, सालभर हो गया, आपने 10 रुपए की नहीं पूछी, एक साल बाद भी आपने पूछा कि एक रुपया चाहिए या नहीं, मेरे भी घर है।
सरपंच- सर, आपको दिए तो हैं, कौन सा काम आपने बिना पैसे के किया है?
सचिव : दो पांच हजार रुपए ही लिए है मैंने आपसे, और बाकि सरपंच सचिवों का पूरा ध्यान रखते हैं, मैंने न दिवाली पर मांगे न ही अन्य थोड़ा झूकना सीखिए।
सरपंच- सर मैं तो पूरा झूक रहा हूं, लेकिन आप काम नहीं कर रहे, आपका तरीका अलग लग रहा है, जनता से जुड़े विकास कार्य है, कर दीजिए?
सचिव : अरे नहीं, तुम्हारा तरीका अलग है, मैं तो काम कर ही रहा हूं, आपने पूछा क्या? जेब से पेट्रोल जलाकर खुद की गाड़ी से आता हूं, सालभर हो गया, मुझे कुछ नहीं मिला।
सरपंच- सर पहले जब दबाव बनाया आपने तब दिए थे तो सही, और कितना दूं?
सचिव: पांच, सात हजार में सालभर होगया, तब से मैं ऐसे ही बैठा रहा, आपने पूछा क्या। आप 20 हजार रुपए कर देना, तभी मैं हस्ताक्षर कर पाऊंगा।
छह माह से हस्ताक्षर नहीं कर रहे, मैंने कई बार कहा लेकिन बिना रुपयों के बात नहीं करते। जनता के काम सीसी रोड और श्मशान में पैबर्स ब्लॉक लगाने के नाम पर 20 हजार रुपए अतिरिक्त मांग रहे हैं। जिससे काम नहीं हो पा रहे हैं और बिल स्वीकृत भी नहीं हो रहे। मुझे छोटी जाति का मानकर खुद के कमरे के बाहर खड़ा रखता है। पंचायत में आधे दिन भी नहीं आता है, जिससे लोग परेशान होते हैं, मेरे पास आते हैं। तंग आकर अब शिकायत करना पड़ी है।-पप्पू मेहतर, सरपंच, ग्राम पंचायत, परसूलिया
मैं अभी समीक्षा बैठक में हूं, कौन कह रहा है मैंने रिश्वत ली, आप सबूत दे दीजिए, वरना मैं जिपं सीईओ से बात कर लेता हूं। आप बता दीजिए मैं राजगढ़ आ जाता हूं, किससे मैंने रिश्वत मांगी, मुझे सबूत दे दें।-प्रशांत शर्मा, सचिव, ग्राम पंचायत, परसूलिया
पंचायत में सभी वर्किंग डे में सचिव को बैठना जरूरी है। साथ ही किसी भी काम के लिए कोई भी राशि लेना पूरी तरह से कानूनी तौर पर गलत है। तत्काल मैं मामले में संज्ञान ले रहा हूं, संबंधित सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंचायत प्रतिदिन खुलेगी, जो भी सचिव रहेगा उसे बैठना ही होगा। -डॉ. इच्छित गढ़पाले, सीईओ, जिला पंचायत, राजगढ़