राजगढ़

78 साल का हुआ राजगढ़ : फोरलेन, रेल लाइन और उद्योगों से बदल रही जिले की तस्वीर

mp news: कभी सड़कों के नाम पर थे सिर्फ पत्थर, अब फोरलेन और उद्योगों का बिछा जाल, रियासत से मेट्रो रीजन तक विकास की बड़ी छलांग

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May 02, 2026
Rajgarh district turns 78 today (Patrika.com)

(रिपोर्ट-लक्ष्मीनारायण यादव, राजगढ़)

mp news: आजादी के बाद मई 1948 में छोटी-बड़ी रियासतों के मेल से आकार लेने वाला राजगढ़ जिला आज अपने गठन के 78वें साल में बदलाव की एक ऐतिहासिक इबारत लिख रहा है। कभी मानसून के भरोसे रहने वाला और संसाधनों के लिए तरसने वाला यह जिला अब विकास की ऐसी छलांग लगा चुका है, जहां अतीत की सादगी और भविष्य की आधुनिकता का संगम नजर आता है। आज राजगढ़ न केवल बुनियादी सुविधाओं में आत्मनिर्भर हुआ है, बल्कि मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल होकर बड़े निवेश और संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

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राजगढ़ दरबार ने सरकार को दिए थे 40 लाख

जिले की स्थापना के समय स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। वरिष्ठ साहित्यकार उमराव सिंह लाखनोत बताते हैं, गठन के वक्त राजगढ़ दरबार ने सरकार को 42 लाख रुपए की राशि सौंपी थी, जिससे विकास का पहिया घूमना शुरू हुआ। उस दौर में खेती महज 10 फीसदी जमीन पर होती थी और सिंचाई के लिए चरस का सहारा लिया जाता था। सड़कें पत्थरों की बनी थीं और व्यापार के नाम पर कागज के दूमले में नमक-मिर्च बिकना ही मुख्य व्यवसाय था। शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर पूरे जिले में केवल दो हायर सेकेंडरी स्कूल और एक बड़ा विनय अस्पताल ही मौजूद था।

आज का राजगढ़ पक्की सड़कों और फोरलेन हाईवे के जाल से ढका हुआ है। मोहनपुरा जैसी सिंचाई परियोजनाओं ने यहां की बंजर भूमि को सोना उगलने वाली मिट्टी में तब्दील कर दिया है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था अब उद्योगों और निवेश की ओर कदम बढ़ा रही है। जिले को अब पर्यटन हब बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है, जिससे स्थानीय रोजगार को नई दिशा मिलेगी। राजगढ़ अब केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि मेट्रोपॉलिटन रीजन का हिस्सा बनकर बड़े महानगरों की तर्ज पर विकसित होने को तैयार है। छोटी रियासतों के एकीकरण से शुरू हुई यह यात्रा अब वैश्विक निवेश और शहरी सुविधाओं के सपने को साकार कर रही है। साक्षरता से लेकर स्वास्थ्य तक, राजगढ़ ने साढ़े सात दशकों में जो दूरी तय की है, वह जिले की अटूट जिजीविषा और प्रशासनिक प्रयासों का जीवंत प्रमाण है।

जिले ने खेती, सड़क, शिक्षा और उद्योगों में किया व्यापक बदलाव

बैलगाड़ी मुख्य साधन, अब रेल और सड़कों का जाल

गठन के समय न रेल थी न अच्छी सड़कें। 1970 के दशक में मक्सी-रुठियाई ट्रैक बनने से रेल सेवा शुरू हुई। अब जिले का ब्यावरा रेलवे जंक्शन बनने जा रहा है। लगभग सभी गांव सडक़ों से जुड़े हैं। दो प्रमुख NH-46 और NH-52 ने जिले को पूरे देश से कनेक्टिविटी मुहैया कराई है।

पहले घर में होती थी डिलेवरी, अब गांवों में पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

आजादी के समय मुख्यालय पर एकमात्र विनय अस्पताल बना। अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी जिला काफी आगे बढ़ा है। राजगढ़ में मेडिकल कॉलेज और ब्यावरा में ट्रामा सेंटर खुलने के बाद और सुधार की संभावना है। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. नितिन पटेल बताते हैं कि स्वास्थ्य में पहले की अपेक्षा काफी सुधार हुआ है। यदि हम आजादी के बाद और 20वीं सदी के आखिरी समय की बात करें तो इस समय गांवों में अधिकांश महिलाओं की डिलेवरी घरों में ही होती थी। अब पूरा परिदृश्य बदला है। हां अब भी सुधार की जरूरत है।

कृषि ने बदली तस्वीर

कृषि व्यवस्था अब पारंपरिक सीमाओं को पार कर चुकी है। मोहनपुरा-कुंडालिया जैसी परियोजनाओं ने खेती का तरीका ही बदल दिया है। ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम आदि ने भी खेती आसान कर दी। बारिश और खरीफ फसलों पर ही जिले की आर्थिक स्थिति टिकी थी। अब जिले में अधिकांश जमीन सिंचित हो रही है। पिछले कुछ सालों में ही सिंचाई का रकबा 8-10 गुना तक बढ़ा है। गर्मी के सीजन में भी किसान फसलें उगा रहे है।

शिक्षा में भी हुआ बदलाव

1950 के दशक में जिले में कुछ ही स्कूल थे, आज दो हजार से अधिक प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी विद्यालय हैं। नवोदय विद्यालय, आदर्श महाविद्यालय, पॉलिटेक्निक संस्थान जैसे शिक्षा के नए केंद्र बने हैं। साथ ही अब मेडिकल कॉलेज बनने से जिले को एक नई पहचान मिलेगी।

अब ये प्रोजेक्ट लिखेंगे विकास की नई इबादत

  • मेडिकल कॉलेज: 2021 में काम शुरू हुआ। अब तक 75 फीसदी काम हुआ।
  • रामगंज मंडी रेल लाइन: 2000 में नींव रखी गई। अब काम अंतिम चरण में।दिसंबर-2026 तक पूरा करने का लक्ष्य।
  • मेट्रोपॉलिटन रीजन: प्रदेश सरकार के अहम प्रोजेक्ट मेट्रोपॉलिटन रीजन में जिले के नरसिंहगढ़, ब्यावरा, पचोर, जीरापुर और खुजनेर को शामिल किया है।
  • फ्यूल प्लांट: मास केमिकल इंडस्ट्री की इसी साल नींव रखने की संभावना।

ये चुनौतियां भी-

गर्मियों में जल संकट, बड़े स्तर पर रोजगार की कमी, शिक्षा में गुणवत्ता सुधार की आवश्यकता, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, उद्योग और रोजगार की कमी।

फैक्ट फाइल

क्षेत्रफल-6,153 वर्ग किमी (25वां स्थान प्रदेश में)
उत्तरीय सीमा- राजस्थान
तहसील- 7
ग्रामों की संख्या- 1,728
जनसंख्या- 1,545,814 (२०११ के अनुसार)
जनसंख्या घनत्व- 251 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
साक्षरता दर- 70.06%
लिंगानुपात- 956
शिशु लिंगानुपात- 912

टाइमलाइन पर एक नजर

  • मई-1948 में गठन
  • 1956 प्रदेश के गठन के बाद नया आकार लिया
  • 1970 के दशक में मक्सी-रुठियाई रेल लाइन का शुभारंभ
  • 2000- रामगंज मंडी लाइन प्रस्ताव
  • 2014-18- मोहनपुरा परियोजना ( यहां के इरिगेशन सिस्टम ने विश्व में दिलाई पहचान)
  • 2023- अमृत भारत स्टेशन
  • 2021- मेडिकल कॉलेज की सौगात
  • 2025- बायो फ्यूल प्लांट
  • 2025- (मेट्रोपॉलिटन प्रोजेक्ट) राजधानी क्षेत्र में जिले के तीन शहर

(नोट- ये लोगो (सिंबोल) के साथ लगाना है।)

क्या आप यह जानते हैं

  • 1995 में मानव विकास रिपोर्ट तैयार करने वाला देश का पहला जिला था।
  • मध्यप्रदेश का राजकीय राजमार्गों का चौराहा ब्यावरा है।
  • देश का पहला सोलर पार्क राजगढ़ में (घरेलू रूप से मॉड्यूल का उपयोग कर बनाया गया।)
  • संस्कृत ग्राम झिरी भी यहां है।
  • 2019 में एकलव्य पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ी गोविंद बैरागी नरसिंहगढ़ के नून्याहेड़ी गांव के निवासी हैं।
  • अंतररराष्ट्रीय हॉकी मैच 1962 में नरसिंहगढ़ में हुआ था

इतिहास की छलकियां

  • राजगढ़ का गठन मई 1948 में मध्यभारत राज्य के गठन के बाद हुआ। पार्ट-बी का हिस्सा बना। इससे पहले इसका क्षेत्र राजगढ़, नरसिंहगढ़, खिलचीपुर, देवास और इंदौर राज्यों के बीच समाहित था।
  • राजगढ़ का पुराना नाम कनकीपुर/झनझनीपुर था। नेवज के समीप, भील जनजाति ने बसाया था। इन्हीं ने नाम दिया। उमठ राजपूतों (परमार) का शासन भी रहा। 1640 में उमठ राजा रावत मोहन सिंह ने भीलों को पराजित कर अपनी राजधानी राजगढ़ को बनाया। इसके बाद अजब सिंह ने राजगढ़ पहाड़ी क्षेत्र में महल का निर्माण करवाया। यह दिल्ली के सुल्तानों और मुगल साम्राज्यों के अधीन एक सनद स्टेट था।
  • नरसिंहगढ़ की स्थापना 1681 में दीवान परसराम ने कराई। यहां खिलजियों का भी शासन रहा। १९वीं सदी में कुंवर चैनसिंह का शासन रहा। आजादी की लड़ाई में चैनसिंह पहले शहीद थे।
  • 1766 में राजा गजसिंह ने अपने पुत्र राजसिंह के नाम पर राजगढ़ दिया। 1908 में सात परगनाओं नयालगंज, बियोरा, कालीपीठ, करनवास, कोटरा, सोहरगढ़ और तलेन में विभाजित किया। नरसिंहगढ़ को चार और खिलचीपुर को तीन परगनाओं में बांटा।

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Published on:
02 May 2026 05:15 pm
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