राजगढ़

3 करोड़ का भवन बेकार ! राजगढ़ में रेलवे की जमीन पर बनाया RTO ऑफिस, 10 साल बाद भी नहीं पता किसकी गलती

RTO office on railway land: तीन करोड़ की लागत से बना आरटीओ भवन रेलवे की जमीन पर निर्माण होने के कारण पिछले 10 साल से बेकार पड़ा है। फाइलों में दबकर रह गया पूरा प्रकरण।
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Sep 18, 2026
आरटीओ ऑफिस (Photo Source - Patrika)
आरटीओ ऑफिस (Photo Source - Patrika)

(राजगढ़ से राजेश विश्वकर्मा की पत्रिका एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)

Rajgarh news: नेशनल हाइवे और रेलवे की संवादहीनता के कारण अटके खिलचीपुर के बायपास के बाद अब जिला मुख्यालय पर हुई बड़ी लापरवाही का मामला भी चर्चा में आया है। राजगढ़ की मौजूदा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की जमीन पर आरटीओ भवन बना दिया गया। तीन करोड़ में भवन बनकर तैयार हो गया, उसके बाद पता चला कि यह जमीन ही आरटीओ और राजस्व विभाग की नहीं है। इसके बाद से न आरटीओ वहां शिफ्ट हो पाया न ही उक्त भवन का उपयोग हो पाया।

वर्ष-2016 में उजागर हुई इस लापरवाही के मामले में 10 साल बाद भी यह तय नहीं हो पाया कि आखिर गलती किसकी है? और वर्तमान में आरटीओ दफ्तर स्टेडियम की शटर वाली दुकानों में संचालित हो रहा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे सरकार ऑफिसरों ने सरकारी सिस्टम को मजाक बनाकर रख दिया है।

राजस्व विभाग ने जगह बनाई, पीआईयू ने बनाई थी ड्राइंग

जानकारी के अनुसार जब आरटीओ के लिए जगह तलाशी जा रही थी, तब संकट मोचन कॉलोनी में काफी जगह थी। राजस्व विभाग के तत्कालीन आरआई, पटवारी ने जगह फाइनल कर के दे दी, उसी पर निर्माण एजेंसी रही पीआईयू ने डिजाइन फाइनल कर दी और डीपीआर बना दिया। यानी जगह किसकी है, इसकी जांच न राजस्व विभाग (जिसकी जिम्मेदारी है) ने की न ही पाआईयू ने दावे आपत्ति की पड़ताल की और भवन बनकर तैयार हो गया। तीन करोड़ की लागत से भवन बन गया, पांच लाख फर्नीचर भी लग गया, तब पता चला कि वह जमीन जिस पर आरटीओ बना है वहां रेल लाइन निकलना है, तब से वह भवन खंडहर बना हुआ है, कोई उपयोग उसका नहीं हो पाया।

वरिष्ठ अफसरों की टीम कर रही है जांच

जानकारी के अनुसार इस पूरे प्रकरण की जांच वरिष्ठ अफसर कर रहे हैं। जिसमें जिसमें वे जिम्मेदार नपना तय हैं, जिन्होंने जगह तय की और जिन्होंने पूरा ड्रॉफ्ट डिजाइन इत्यादि तैयार किया। हालांकि यह जांच बीते 10 साल से चल रही है लेकिन तारीख पर तारीख इसमें चल रही है। खास बात यह है कि जिस विभाग का वह भवन है, उसके अधिकारियों से लेकर आयुक्त तक को यह नहीं पता कि आखिरकार उक्त मामले का हुआ क्या है? साथ ही यह भी सुनिश्चित नहीं किया गया कि कोई कार्रवाई होगी भी या नहीं न ही नए भवन को लेकर कोई तैयारियां नजर नहीं आती।

उक्त भवन में रेलवे का विश्राम गृह बनाने की तैयारी

जानकारी के अनुसार बिना किसी योजना के बनाया गया उक्त आरटीओ भवन अब रेलवे के काम आएगा। यानी रेलवे की जमीन में बने उक्त भवन को रेलवे उपयोग लेगा। वहां विश्राम गृह बनाया जाएगा, जिसका उपयोग रेलवे ही करेगा। हालांकि इसकी योजना तो बना ली गई है लेकिन यह तय नहीं हो पाया है कि इसका हर्जाना कौन भुगतेगा? फिलहाल सभी विभाग जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे।

मुझे कुछ भी नहीं पता, कोई अपडेट नहीं

इस संबंध में मुझे कुछ नहीं पता कि क्या हो रहा है, 10 साल पुराना मामला है। पूरा मामला राजस्व विभाग का है, उन्हीं की गलती से यह हुआ है, उन्हें ही यह सुनिश्चित करना है। शासन स्तर पर है मेरी जानकारी में नहीं है। यह समझ से परे है कि आखिर जमीन परितर्तित कैसे हुई? -ज्ञानेंद्र वैश्य, जिला परिवहन अधिकारी, राजगढ़

मुझे देखना पड़ेगा, जानकारी में नहीं है….

इतना बड़ा मामला है लेकिन मेरी जानकारी में नहीं है, मुझे देखना पड़ेगा। मैं आरटीओ से फाइल बुलवा लेता हूं, क्या स्टेटस है और क्या होने वाला है, यह देखते हैं। -उमेश जोगा, परिवहन आयुक्त, ग्वालियर

Updated on:
18 Sept 2026 08:50 am
Published on:
18 Sept 2026 08:49 am