
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में बाल विवाह, मानव तस्करी और झगड़ा प्रथा ने इससे जूझ रहे लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। जिस उम्र में हाथों में किताबें और आंखों में भविष्य के सपने होने चाहिए थे, उस उम्र में एक किशोरी के साथ कथित शोषण हुआ। महज 14 साल की उम्र में उसे बेच दिया गया और 15 साल की उम्र में वह मां बन गई। अब 19 साल में वो अपने अतीत की पीड़ा से निकलकर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहती है।
आरुषि (परिवर्तित नाम) ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर न्याय, सुरक्षा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। युवती ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उसकी मां ने उसे करीब 35 से 40 साल के श्याम उर्फ शांति, निवासी खीमाखेड़ी (राजगढ़) को बेच दिया था। इसके बाद उसके साथ बार-बार शारीरिक शोषण और मारपीट की गई। युवती का कहना है कि, विरोध करने पर भी उसे राहत नहीं मिली। कम उम्र में गर्भवती होने के बाद उसे 15 साल में बच्ची को जन्म देना पड़ा। अब वो झगड़े का दंश सह रही है, इन तमाम शिकायतों को लेकर वो एसपी के समक्ष पहुंची।
पीड़िता के अनुसार, 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद उसने अपनी इच्छा से करीब 23 वर्षीय संदीप (परिवर्तित नाम) से विवाह किया। फिलहाल, वो पति के साथ रह रही है, जबकि उसकी पहली बच्ची उसकी मां के पास है। युवती का आरोप है कि, अब उसकी मां और श्याम उर्फ शांति उसे और उसके पति को परेशान कर रहे हैं और विवाद कर रहे हैं। वो पुराने घटनाक्रम से निकलकर बिना किसी डर और तनाव के जीवन बिताना चाहती है।
शिकायत में युवती ने आधार कार्ड में वास्तविक उम्र से करीब सात वर्ष अधिक दर्ज करवाने का आरोप भी लगाया है। उसका कहना है कि, दोराहा स्थित ज्ञानवेली स्कूल के रिकॉर्ड में उसकी जन्मतिथि 3 जुलाई 2007 दर्ज है। उसने संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक उम्र का सत्यापन कराने की मांग की है। उम्र से जुड़े दस्तावेज इस मामले में अहम साक्ष्य हो सकते हैं, क्योंकि आरोपित घटनाक्रम के समय युवती नाबालिग थी या नहीं, यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू है।
आरुषि ने पुलिस अधीक्षक से नाबालिग अवस्था में बेचे जाने, कथित शारीरिक शोषण, मारपीट, उम्र संबंधी दस्तावेजों में कथित हेरफेर और वर्तमान में परेशान किए जाने के आरोपों की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उसने अपनी सुरक्षा के साथ बच्ची के कल्याण के लिए भी आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।
मामले को लेकर अहिंसा वेलफेयर सोसायटी, राजगढ़ के मनीष दांगी ने घटना नाबालिग अवस्था में होने के आरोपों को देखते हुए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साक्ष्यों के आधार पर पॉक्सो अधिनियम तथा खरीद-फरोख्त और मानव तस्करी से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत एफआइआर दर्ज कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन युवती की शिकायत के साथ उसकी सुरक्षा, बच्ची के कल्याण और कथित घटनाक्रम के समय उसकी उम्र से जुड़े तथ्यों की जांच भी महत्वपूर्ण है। सपना अब अपने अतीत के आरोपों की निष्पक्ष जांच और वर्तमान में सुरक्षित, शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर चाहती है।