राजनंदगांव

छत्तीसगढ़ के जंगलों में वैज्ञानिकों की बड़ी खोज! पहली बार दर्ज हुईं मकड़ियों की 3 दुर्लभ प्रजातियां, जानें क्यों है खास

Rare Spider Discovery: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के घने जंगलों से वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। यहां किए गए सर्वेक्षण में मकड़ियों की तीन दुर्लभ प्रजातियों का पहली बार वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण हुआ है।
2 min read
New Spider Record India
मकड़ियों की 3 दुर्लभ प्रजातियां (फोटो सोर्स- पत्रिका)

राजनांदगांव@ गोविन्द साहू। Chhattisgarh Rare Spider Species: प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। गरियाबंद के घने जंगलों में किए गए एक हालिया वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मकड़ियों की तीन अत्यंत दुर्लभ प्रजातियों का दस्तावेजीकरण हुआ है। इस खोज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से दो प्रजातियों का प्रदेश में 'पहली बार' वैज्ञानिक वितरण रेकॉर्ड दर्ज किया गया है, जबकि एक अन्य दुर्लभ प्रजाति के नर का भी राज्य से पहला प्रामाणिक रेकॉर्ड मिला है।

इस ऐतिहासिक खोज से प्रदेश के वन्यजीव और पर्यावरण अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर एक नया आधार मिलेगा। यह महत्वपूर्ण शोध डॉ. अविनाश आर. निचत, डॉ. केके हैरिस, जशवंत नायक, मानसी मजूमदार और राजनांदगांव के प्रतिभावान रिसर्च स्कॉलर हितेश कुमार वारते की संयुक्त टीम द्वारा किया गया है। स्पाइडर डायवर्सिटी पर केंद्रित इस अध्ययन में निम्नलिखित प्रजातियों की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि हुई है।

  • जिया सुबरमाटा: इसका छत्तीसगढ़ में यह पहला वैज्ञानिक वितरण रेकॉर्ड है।
  • हमातालिवा पेंटागोना: इस प्रजाति को भी पहली बार राज्य के वन्य क्षेत्र में दर्ज किया गया है।
  • ब्रिटस सिग्यूलेटस: इस प्रजाति के नर का यह राज्य से पहला वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण है। इससे पहले भारत और प्रदेश में केवल इसकी मादा का रेकॉर्ड ही उपलब्ध था।

पर्यावरण और वन प्रबंधन के लिए क्यों अहम

शोधकर्ताओं के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्ग-130 से सटे गरियाबंद के वन क्षेत्र जैव विविधता के मामले में अविश्वसनीय रूप से समृद्ध हैं। यहां मकड़ियों की कई अन्य अज्ञात और दुर्लभ प्रजातियों के होने की भी प्रबल संभावना है। पारिस्थितिकी तंत्र में मकड़ियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ये प्राकृतिक रूप से फसलों और वनों को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक कीटों की आबादी को नियंत्रित रखती हैं। ऐसे में इनका वैज्ञानिक अध्ययन न केवल पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से जरूरी है, बल्कि भविष्य के वन प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अनुसंधानों के लिए भी एक ठोस वैज्ञानिक आधार तैयार करेगा।

शोध के मुख्य बिंदु:

  • गरियाबंद के जंगलों से मकड़ियों की तीन दुर्लभ प्रजातियों का नया वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण।
  • दो प्रजातियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार आधिकारिक वितरण रेकॉर्ड।
  • 'ब्रिटस सिग्यूलेटस' के नर का पहला प्रामाणिक रेकॉर्ड मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह।
  • इस खोज से छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।
Updated on:
13 Jul 2026 07:17 am
Published on:
13 Jul 2026 07:17 am