
Fake transfer orders in Rajnandgaon: एआई की मदद से तैयार किए गए कथित फर्जी तबादला आदेश ने शिक्षा विभाग में विभागीय कार्यप्रणाली और सरकारी आदेशों की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश जारी होने के बाद तीन शिक्षकों के तबादले की चर्चा शुरू हुई, लेकिन न तो संबंधित शिक्षकों को रिलीव किया गया और न ही दूसरे स्थान पर पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी हो सकी। इससे शिक्षक असमंजस में रहे और विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटते रहे।
मामले के अनुसार, आदेश में राजनांदगांव जिले के तीन शिक्षकों का स्थानांतरण दर्शाया गया था। इनमें एक शिक्षक को बालोद जिले से राजनांदगांव आना था, जबकि राजनांदगांव के शिक्षकों को अन्य स्थानों पर जाना था। आदेश के आधार पर संबंधित शिक्षकों ने आगे की प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद की, लेकिन इसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठने के बाद मामला अटक गया।
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग सतर्क हुआ। जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल के अनुसार, फर्जी आदेश की सूचना मिलने पर विभाग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच कराई। जांच में आदेश फर्जी पाया गया। इसके बाद संबंधित शिक्षकों को कार्यमुक्त करने और नए स्थान पर ज्वाइनिंग देने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।
इस घटना ने डिजिटल माध्यम से तैयार दस्तावेजों की सत्यता जांचने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सरकारी आदेशों की आधिकारिक पुष्टि के बिना उन पर कार्रवाई करना विभाग के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में सत्यापन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।