
Naxal Base Camp School: कभी जिन परिसरों में सुरक्षा बलों के जवान नक्सलियों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन की रणनीति तैयार करते थे, वहां अब बच्चों की पढ़ाई होगी और युवाओं को रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (MMAC) जिले में सुरक्षा के प्रतीक रहे बेस कैंप अब विकास की नई पहचान बनने जा रहे हैं।
जिला पुलिस प्रशासन ने नक्सलमुक्त घोषित क्षेत्रों में खाली पड़े सुरक्षा बलों के बेस कैंपों को स्कूल, कौशल विकास केंद्र और जनकल्याण केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। इस पहल को नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा से विकास की ओर बढ़ते बदलाव का सशक्त उदाहरण माना जा रहा है।
इस परिवर्तन की शुरुआत मानपुर से हो चुकी है। पुलिस विभाग ने यहां का पूर्व बेस कैंप जिला प्रशासन को सौंप दिया है, जहां वर्तमान शैक्षणिक सत्र से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय का संचालन शुरू हो चुका है। जो परिसर कभी सुरक्षा बलों की गतिविधियों और रणनीतिक बैठकों का केंद्र हुआ करता था, वहां अब बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद और भविष्य निर्माण की नींव रखी जा रही है। यह बदलाव केवल भवनों के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंसा से शांति और संघर्ष से विकास की ओर बढ़ते नए दौर का प्रतीक बन गया है।
पुलिस प्रशासन की योजना के अनुसार, जिन बेस कैंपों की अब सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यकता नहीं रह गई है, उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित किया जाएगा। इनमें स्कूलों के अलावा कौशल विकास केंद्र, जनकल्याण केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं संचालित की जाएंगी, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के अवसर मिल सकें। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और सरकारी सेवाओं को नक्सल प्रभावित रहे दूरस्थ इलाकों तक पहुंचाना है, जिससे विकास की मुख्यधारा से जुड़े लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
एमएमएसी जिले को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद सुरक्षा बलों की चरणबद्ध वापसी शुरू हो गई है। इसके चलते कई बेस कैंप खाली हो रहे हैं। अब इन्हें शिक्षा और विकास के केंद्रों में बदलने की योजना तैयार की गई है। जिला पुलिस प्रशासन का मानना है कि इससे न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि उन क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी, जहां कभी नक्सली हिंसा का असर सबसे अधिक था।
जिला पुलिस अधीक्षक वाई.पी. सिंह ने बताया कि नक्सलमुक्त घोषित क्षेत्रों से सुरक्षा बलों की वापसी के बाद खाली हो रहे बेस कैंपों को स्कूल और कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि मानपुर के पूर्व बेस कैंप में इसी शैक्षणिक सत्र से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय का संचालन शुरू हो चुका है, जो इस बदलाव की पहली सफल मिसाल है। यह पहल इस बात का संकेत है कि जिन इलाकों में कभी बंदूकें और सुरक्षा रणनीतियां केंद्र में थीं, वहां अब शिक्षा, कौशल और विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।