
Rajanandgaon News: देश-विदेश में बांस वादन की मधुर तान से भारत की लोक संस्कृति का परचम लहराने वाले अंतरराष्ट्रीय लोक कलाकार विक्रम यादव आज गुमनामी, बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। इस बीच पत्रिका ने अंतरराष्ट्रीय कलाकार विक्रम यादव की बदहाल स्थिति होने की खबर प्रकाशित की। इसके बाद राजनांदगाव के महापौर मधुसूदन यादव ने तुरंत संज्ञान लिया। महापौर ने कलाकार की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार शुरू हो गया है।
जानकारी के अनुसार, लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे अंतरराष्ट्रीय कलाकार विक्रम यादव आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति सामने आने के बाद शहर के लोगों में भी चिंता का माहौल था। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद महापौर ने तत्काल अधिकारियों से संपर्क कर कलाकार के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित कराई।
महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि शहर के कलाकार हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। किसी भी कलाकार को बीमारी या आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने विक्रम यादव के समुचित इलाज और आवश्यक सहयोग का भरोसा दिलाया। पत्रिका द्वारा कलाकार की स्थिति को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर गया। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए कलाकार को अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज शुरू कराया गया।
राजनांदगांव जिले के खैरा गांव निवासी विक्रम यादव छत्तीसगढ़ की लोक कला के उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहचान बनाई। उन्होंने लंबे समय तक देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के प्रतिष्ठित "नया थियेटर" से जुडक़र अभिनय, लोक संगीत और बांस वादन के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। नया थियेटर के साथ उन्होंने देशभर में सैकड़ों प्रस्तुतियां दीं और विदेशों में भी भारतीय लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया।
विक्रम यादव की बांस वादन की मधुर धुन और बांस गीत की प्रस्तुति विदेश के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर चुकी है। विदेशी मंचों पर उनकी कला को खूब सराहा गया और उन्हें कई सांस्कृतिक आयोजनों में सम्मान भी मिला। लेकिन विडंबना यह है कि जिस कलाकार ने विदेशों में देश का नाम रोशन किया।