राजनंदगांव

मोहला-मानपुर में ‘हरा सोना’ का सीजन शुरू, नक्सल साये से मिली आजादी, DFO की अपील- जंगल में सतर्क रहें

Tendu Patta News: मोहला-मानपुर जिले में ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता का संग्रहण इस बार बेखौफ तरीके से जारी है। प्रशासन का दावा है कि नक्सल प्रभाव कम होने से ग्रामीण बिना डर जंगलों में काम कर रहे हैं, जबकि वन विभाग ने जंगली जानवरों से सतर्क रहने की अपील की है।

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Tendu Patta News(photp-patrika)

Tendu Patta News: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में इन दिनों ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता का संग्रहण पूरे जोर-शोर से जारी है। जिले में इस बार तेंदूपत्ता सीजन कई मायनों में खास माना जा रहा है, क्योंकि वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में अब ग्रामीण बिना किसी डर के जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता तोड़ रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि जिले से नक्सलवाद का साया लगभग खत्म हो चुका है और इसी वजह से इस बार तेंदूपत्ता संग्रहण पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर होने की उम्मीद है। जिले में कुल 39 समितियों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य संचालित किया जा रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से जंगल में सावधानी बरतने और जंगली जानवरों से सतर्क रहने की अपील भी की है।

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Tendu Patta News: प्रदेश का बड़ा तेंदूपत्ता उत्पादक जिला

मोहला-मानपुर जिला छत्तीसगढ़ के प्रमुख तेंदूपत्ता संग्रहण क्षेत्रों में गिना जाता है। हर साल यहां से बड़ी मात्रा में तेंदूपत्ता संग्रहित कर विभिन्न स्थानों तक भेजा जाता है। तेंदूपत्ता ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और हजारों परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। वन विभाग के अनुसार जिले से हर वर्ष बड़ी मात्रा में मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया जाता है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार और अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत मिलता है।

80 हजार मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य

दिनेश पटेल के मुताबिक राजनांदगांव यूनियन अंतर्गत मोहला-मानपुर जिले में इस बार बड़े स्तर पर तेंदूपत्ता संग्रहण किया जा रहा है। पूरे यूनियन में 80 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसमें से लगभग 60 हजार मानक बोरा संग्रहण अकेले मोहला-मानपुर जिले से किया जाना है। जिले में बनाई गई 39 समितियां अलग-अलग क्षेत्रों में संग्रहण कार्य करवा रही हैं।

बारिश का पड़ा आंशिक असर

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शुरुआती बारिश के कारण कुछ इलाकों में संग्रहण कार्य प्रभावित हुआ था। कई जगहों पर बारिश से तेंदूपत्तों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ा और कुछ पत्ते खराब हो गए। हालांकि अब मौसम साफ होने लगा है और विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही सभी समितियों में संग्रहण कार्य पूरी गति से शुरू हो जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने पर इस बार लक्ष्य आसानी से पूरा किया जा सकता है।

पहले नक्सलियों का रहता था खौफ

तेंदूपत्ता सीजन के दौरान पहले नक्सली गतिविधियां बड़ी चुनौती मानी जाती थीं। कई बार नक्सली तेंदूपत्तों में आगजनी कर देते थे और ठेकेदारों तथा ग्रामीणों को लेवी के लिए धमकाते थे। इन घटनाओं के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता था और संग्रहण कार्य प्रभावित होता था। लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।

“अब नक्सल खौफ नहीं”- DFO

DFO दिनेश पटेल ने कहा कि इस बार नक्सलियों द्वारा तेंदूपत्तों में आगजनी या व्यवधान डालने जैसी घटनाओं की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही और लोग बेखौफ होकर जंगलों में तेंदूपत्ता संग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि जंगलों में जाते समय जंगली जानवरों से सतर्क रहें और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। विभाग भी लगातार निगरानी बनाए हुए है।

ग्रामीणों में बढ़ा आत्मविश्वास

नक्सल प्रभाव कम होने के बाद ग्रामीणों में आत्मविश्वास बढ़ा है। तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार वे बिना डर के काम कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ने की उम्मीद है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि इसी तरह शांति और सुरक्षा का माहौल बना रहा तो आने वाले वर्षों में जिले की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अहम है तेंदूपत्ता

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता केवल वन उपज नहीं बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है। गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता संग्रहित करते हैं और इससे मिलने वाली राशि से परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं।

Published on:
12 May 2026 04:27 pm
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