women safety campaign: महिलाओं के खिलाफ होने वाले छोटे-छोटे अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कानून बनाकर अपराधियों को सजा देने की जरूरत है। तभी उनमें खौफ रहेगा।
women safety campaign: महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं को काम के सिलसिले में सुबह-शाम और रात में भी अपने कार्य क्षेत्र में रहना पड़ता है। इसके चलते महिलाओं के साथ कई तरह के अपराध भी बढ़ते जा रहे हैं। पत्रिका की ओर से महिला अपराध के खिलाफ में रक्षा कवच महिला सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को जागरूक कर रहे।
‘पत्रिका’ की महिला सुरक्षा अभियान व वर्तमान परिदृश्य में महिलाओं के प्रति समाज की सोच, उनकी सुरक्षा को लेकर कानून व्यवस्था को लेकर युवती व महिलाओं से चर्चा की गई। उन्होंने पत्रिका से चर्चा के दौरान बेबाकी से अपनी बात रखी। कहा कि हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से आने वाले समय में बेहतर और सशक्त समाज का निर्माण होगा, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा बड़ी चिंता है। सामने आने की जरूरत है। महिला सुरक्षा को लेकर कड़े कानून बनाए जाएं।
कुसुम दुबे, अधिवक्ता, राजनांदगांव: महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। भारतीय संविधान में महिलाओं को पर्याप्त अधिकार दिए हैं। बस उनका उपयोग हमें करना है। हर अन्याय के खिलाफ नारी शक्ति मजबूती से खड़े हो, तो समाज एक नई दिशा और प्रगति की ओर अग्रसर होगा। महिलाएं असुरक्षित महसूस न करें, पुलिस और कानून की मदद लेने से भी न चुकें।
कुमकुम साहू, कॉलेज छात्रा: स्कूल-कॉलेज आते-जाते समय भी युवतियों को कई तरह की महिला उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, इसके लिए युवतियों को सेल्फ डिफेंस के गुर सीखने के साथ ही अपने साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता है। महिला सुरक्षा के लिए बनी कमेटी और पुलिस को भी सजग व तत्पर रहने की जरूरत है।
जितेश्वरी साहू, गृहणी: गांवों में भी महिलाएं कामकाज के लिए निकलती हैं। इसके अलावा वे बाजार क्षेत्र में भी कई बार ऐसे व्यवहार का शिकार हो जाती हैं, जिससे कि वे असहज महसूस करती हैं। महिलाओं के खिलाफ होने वाले छोटे-छोटे अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कानून बनाकर अपराधियों को सजा देने की जरूरत है। तभी उनमें खौफ रहेगा।
women safety campaign: कविता साहू, प्राइवेट टीचर: महिलाओं के प्रति सम्मान रखने की भावना समाज में जागृत करने की जरूरत है। इसके लिए बच्चों और युवाओं को घर, स्कूल और कॉलेजों में नैतिक शिक्षा देने की जरूरत है। आज के समय में किसी न किसी स्तर पर युवती और महिलाओं को दुर्व्यवहार या उत्पीड़न सहना पड़ता है। इसके लिए महिलाओं को अपने बॉडी लैंग्वेज और मन से दृढ़ रहना है।