
राजसमंद. घर में छोटी सी बात को लेकर आपसी मनमुटाव के बाद पति व पत्नी के रिश्ते में ऐसी दरार पड़ रही है। आजकल हर शख्स की स्मार्ट फोन पर बढ़ती व्यस्तता, धैर्य की कमी की वजह से वैवाहिक रिश्ते की नींव दिनोंदिन कमजोर पड़ती जा रही है। वैवाहिक रिश्ता समर्पण, प्यार व विश्वास पर निर्भर करता है, मगर पति व पत्नी में एक दूसरे के प्रति बढ़ते अविश्वास से बात तलाक तक पहुंच गई।
ऐसे हालात में भी एक छोटे से परामर्श ने दर्जनों दम्पत्यिों का मनमुटाव दूर कर दिया और वे अब खुशी से वैवाहिक जीवन यापन कर रहे हैं। दाम्पत्य जीवन के रिश्ते को विश्वास की मजबूत डोर से बांधने का अटल प्रयास महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र का रहा। केन्द्र पर परामर्श से राजसमंद जिले के 76 दम्पत्तियों का मनमुटाव दूर हुआ, बल्कि उनका दाम्पत्य जीवन खुशियों से लबरेज हो गया। उल्लेखनीय है कि महिला सलाह सुरक्षा केन्द्र नवम्बर 2015 से संचालित है, जहां अप्रैल 2018 तक 76 टूटते परिवार फिर एक हो गए।
इसलिए कमजोर हो गए रिश्ते
पति- पत्नी के मनमुटाव व तलाक तक बात पहुंचने के ज्यादातर प्रकरणों में बात छिटपुट ही सामने आई है, मगर अविश्वास औ शक की वजह से बात का बतंगड़ बन गया। साथी के अनुकूल खुद को बदलने की बजाय एक दूजे की मीनमेख निकालना, जरूरत से ज्यादा अपेक्षा करना, ताना मारने के कारण सामने आए, जिनकी वजह से वैवाहिक जीवन में दरार पड़ी।
तारीफ से रिश्ते की मजबूती संभव
काउंसलर संगीता चौधरी ने बताया कि अगर पति व पत्नी एक दूजे की तारीफ करें, तो स्वत: उनका विश्वास बढ़ सकता है। तारीफ ही उदासीन रिश्तों में ताजग़ी का अहसास कराते हैं। अब तक मेरा अनुभव भी रहा कि जिन जिन दम्पत्तियों रिश्ते में मनमुटाव आया, उनमें एक दूसरे के प्रति विश्वास में कमी आई। हर बात को लेकर एक दूजे को शक के नजरिये से देखा गया। आपसी कमियां बताने की जाय अगर खुद को एक दूजे के अनुकूल बदल लें, तो वैवाहिक रिश्ते मधुर व मजबूत संभव है।
गौरी का बस गया घर
शास्त्री नगर कांकरोली में गौरीदेवी व हमेर साथ रहना चाहते थे, मगर उनके परिजनों के बीच मनमुटाव की वजह से वे एक दूजे के खिलाफ हो गए। 26 सितंबर 2016 को परामर्श करवाया। फिर समय देकर 15 अक्टूबर 2016 को दोनों पक्षों से समझाइश की, तो फिर सभी रजामंद हो गए और गौरी का टूटता घर फिर बस गया।
समझाइश से आया बदलाव
ज्यादातर पति व पत्नी में मनमुटाव छिटपुट घरेलू बात से ही हुआ, मगर दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश की गई तो उनकी गलतफहमियां दूर हो गई। इसी का परिणाम है कि ढाई साल में 76 दम्पत्ती एक हो गए।
यशोदा सोनी, काउंसलर महिला सुरक्षा एवं सलाह केन्द्र राजसमंद