राजसमंद. मोबाइल फोन, क्यूआर कोड, यूपीआई और ऑनलाइन पोर्टल- राजसमंद ज़िले में विकास की यह नई तस्वीर अब आम होती जा रही है। सरकारी योजनाओं से लेकर रोज़मर्रा की खरीदारी तक, सब कुछ डिजिटल हो रहा है। लेकिन इस चमकदार डिजिटल तस्वीर के पीछे एक सवाल लगातार गहराता जा रहा है—क्या डिजिटल इंडिया सच में […]
राजसमंद. मोबाइल फोन, क्यूआर कोड, यूपीआई और ऑनलाइन पोर्टल- राजसमंद ज़िले में विकास की यह नई तस्वीर अब आम होती जा रही है। सरकारी योजनाओं से लेकर रोज़मर्रा की खरीदारी तक, सब कुछ डिजिटल हो रहा है। लेकिन इस चमकदार डिजिटल तस्वीर के पीछे एक सवाल लगातार गहराता जा रहा है—क्या डिजिटल इंडिया सच में सुविधा दे रहा है या आम लोगों पर एक नया, अदृश्य डिजिटल टैक्स थोप रहा है?
राजसमंद शहर, नाथद्वारा रोड, आमेट, रेलमगरा, देवगढ़ और कुंवारिया जैसे इलाकों में आज छोटी दुकानों से लेकर बड़े मार्बल व्यापार तक यूपीआई भुगतान आम हो चुका है। सरकारी भुगतान, पेंशन, छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि अब लगभग पूरी तरह डिजिटल हैं।
डिजिटल लेन-देन भले ही कागज़ों में मुफ्त हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। स्मार्टफोन खरीदना, महंगे इंटरनेट रिचार्ज, बिजली पर निर्भरता और तकनीकी खराबी का जोखिम। ये सभी मिलकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक अदृश्य डिजिटल टैक्स बनते जा रहे हैं। राजसमंद जैसे अर्ध-ग्रामीण जिले में यह बोझ उन लोगों पर ज़्यादा है, जिनके लिए मोबाइल अब सुविधा नहीं, मजबूरी बन चुका है।
डिजिटल विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराध भी तेज़ी से बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में राजसमंद में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट और ओटीपी फ्रॉड के मामलों में कई गुना इज़ाफा हुआ है। इनमें से कई पीड़ितों को यह तक पता नहीं होता कि उनका डेटा कैसे और किसके पास पहुंच गया। जिला स्तर पर प्रभावी साइबर हेल्प डेस्क और त्वरित समाधान व्यवस्था का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना देता है।
डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल डिवाइड है। जहां शहरी इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट और ऐप आधारित सेवाएं उपलब्ध हैं, वहीं कई ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कमजोर नेटवर्क या 2 जी कनेक्टिविटी ही हकीकत है। कई गांवों में ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के लिए लोगों को 20–30 किलोमीटर दूर ई-मित्र केंद्र जाना पड़ता है। ऐसे में:-
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले राजस्थान सरकार के बजट में राजसमंद जैसे जिलों के लिए डिजिटल संतुलन नीति की ज़रूरत है। बजट में प्रमुख प्रावधान होने चाहिए:-
डिजिटल व्यवस्था के फायदे