राजसमंद

डिजिटल टैक्स: जेब पर अदृश्य बोझ, सबसे बड़ा अनदेखा खतर, लेकिन हर हाथ नहीं पहुंच रही सुविधा

राजसमंद. मोबाइल फोन, क्यूआर कोड, यूपीआई और ऑनलाइन पोर्टल- राजसमंद ज़िले में विकास की यह नई तस्वीर अब आम होती जा रही है। सरकारी योजनाओं से लेकर रोज़मर्रा की खरीदारी तक, सब कुछ डिजिटल हो रहा है। लेकिन इस चमकदार डिजिटल तस्वीर के पीछे एक सवाल लगातार गहराता जा रहा है—क्या डिजिटल इंडिया सच में […]

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Digital Tax News

राजसमंद. मोबाइल फोन, क्यूआर कोड, यूपीआई और ऑनलाइन पोर्टल- राजसमंद ज़िले में विकास की यह नई तस्वीर अब आम होती जा रही है। सरकारी योजनाओं से लेकर रोज़मर्रा की खरीदारी तक, सब कुछ डिजिटल हो रहा है। लेकिन इस चमकदार डिजिटल तस्वीर के पीछे एक सवाल लगातार गहराता जा रहा है—क्या डिजिटल इंडिया सच में सुविधा दे रहा है या आम लोगों पर एक नया, अदृश्य डिजिटल टैक्स थोप रहा है?

यूपीआई: सुविधा जिसने आदत बदल दी, विकल्प नहीं छोड़ा

राजसमंद शहर, नाथद्वारा रोड, आमेट, रेलमगरा, देवगढ़ और कुंवारिया जैसे इलाकों में आज छोटी दुकानों से लेकर बड़े मार्बल व्यापार तक यूपीआई भुगतान आम हो चुका है। सरकारी भुगतान, पेंशन, छात्रवृत्ति, किसान सम्मान निधि अब लगभग पूरी तरह डिजिटल हैं।

क्या कहते हैं तथ्य

  • शहरी राजसमंद में करीब 65 से 70 प्रतिशत लेन-देन डिजिटल हो चुके हैं
  • ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा अब भी 30–35 प्रतिशत के आसपास है
  • सर्वर डाउन या मोबाइल खराब होने पर नहीं होता भुगतान
  • दुकानदार अब कैश लेने से करते हैं इनकार
  • बुज़ुर्ग, अशिक्षित और स्मार्टफोन से दूर लोग हाशिये पर आ रहे नजर

डिजिटल सुविधा या डिजिटल टैक्स?

डिजिटल लेन-देन भले ही कागज़ों में मुफ्त हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। स्मार्टफोन खरीदना, महंगे इंटरनेट रिचार्ज, बिजली पर निर्भरता और तकनीकी खराबी का जोखिम। ये सभी मिलकर गरीब और मध्यम वर्ग के लिए एक अदृश्य डिजिटल टैक्स बनते जा रहे हैं। राजसमंद जैसे अर्ध-ग्रामीण जिले में यह बोझ उन लोगों पर ज़्यादा है, जिनके लिए मोबाइल अब सुविधा नहीं, मजबूरी बन चुका है।

डेटा सुरक्षा: सबसे बड़ा और सबसे खामोश खतरा

डिजिटल विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराध भी तेज़ी से बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में राजसमंद में ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट और ओटीपी फ्रॉड के मामलों में कई गुना इज़ाफा हुआ है। इनमें से कई पीड़ितों को यह तक पता नहीं होता कि उनका डेटा कैसे और किसके पास पहुंच गया। जिला स्तर पर प्रभावी साइबर हेल्प डेस्क और त्वरित समाधान व्यवस्था का अभाव इस समस्या को और गंभीर बना देता है।

डिजिटल डिवाइड: विकास की सबसे गहरी खाई

डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल डिवाइड है। जहां शहरी इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट और ऐप आधारित सेवाएं उपलब्ध हैं, वहीं कई ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी कमजोर नेटवर्क या 2 जी कनेक्टिविटी ही हकीकत है। कई गांवों में ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के लिए लोगों को 20–30 किलोमीटर दूर ई-मित्र केंद्र जाना पड़ता है। ऐसे में:-

  • छात्र ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं
  • किसान डिजिटल मंडी और पोर्टल का पूरा लाभ नहीं उठा पाते
  • यह स्थिति साफ़ संकेत देती है कि तकनीक सबके लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं है।

राजस्थान सरकार के बजट से क्या उम्मीदें?

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले राजस्थान सरकार के बजट में राजसमंद जैसे जिलों के लिए डिजिटल संतुलन नीति की ज़रूरत है। बजट में प्रमुख प्रावधान होने चाहिए:-

  • हर पंचायत तक हाई-स्पीड इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क विस्तार
  • जिला स्तर पर डिजिटल साक्षरता अभियान, विशेषकर बुज़ुर्गों और किसानों के लिए
  • 24×7 साइबर सुरक्षा और हेल्प डेस्क की स्थापना
  • कैश और डिजिटल—दोनों को समान रूप से स्वीकार करने की नीति

फायदे और नुकसान:दोनों का सच

डिजिटल व्यवस्था के फायदे

  • सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता
  • भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
  • समय और संसाधनों की बचत
  • लाभ सीधे खातों में

नुकसान भी कम नहीं

  • तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता
  • गरीब और अशिक्षित वर्ग का बहिष्कार
  • साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
  • निजी डेटा की असुरक्षा
Updated on:
06 Feb 2026 12:03 pm
Published on:
06 Feb 2026 11:52 am
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