कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए पहले ही मिल चुकी है सैद्धांतिक स्वीकृति टाइगर रिजर्व घोषित होने से मिलेगा पर्यटन को बढ़ावा और होगा विकास
राजसमंद. कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित किए जाने के लिए राज्य सरकार के स्तर पर कमेटी के गठन का इंतजार है। उक्त कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही कुंभलगढ़ टाइगर रिजर्व घोषित होगा, जबकि टाइगर रिजर्व घोषित होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
कुंभलगढ़ को टाइगर रिजर्व घोषित करवाए जाने के लम्बे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एनटीसीए की टीम भी करीब दो साल पहले निरीक्षण कर रिपोर्ट भी सौंप दी है, लेकिन राज्य सरकार को वन विभाग के उच्चाधिकारियों और विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन करना है, जो कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य का दौरा करेगी। कमेटी में सीसीएफ, डीएफओ सहित चार से पांच वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल होंगे। इनकी रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार टाइगर रिजर्व का नोटिफिकेशन जारी करेगी, लेकिन यह काम करीब एक साल से अटका हुआ है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल रखा था। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इसके लिए फिर से प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे राज्य सरकार जल्द से जल्द कमेटी का गठन कर इस काम को आगे बढ़ा सके।
पिछले साल 22 अगस्त, 2023 को एनटीसीए ने कुम्भलगढ़ बाघ संरक्षण परियोजना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसी अवधि में एनटीसीए की सिफारिश के बाद धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व को विशेषज्ञ समिति के परामर्श के बाद राज्य सरकार ने अधिसूचित कर दिया था, लेकिन कुम्भलगढ़ के मामले में तेजी नहीं दिखाई गई। इसके कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके पश्चात विधानसभा चुनाव और अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण भी इसे गति नहीं मिल पाई है। आगामी दिनों में आचार संहिता हटने पर इसके लिए फिर से प्रयास किए जाने चाहिए।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कुंभलगढ़ में आवास की बनावट, पानी की उपलब्धता, बाघिनों के लिए पर्याप्त प्रसवस्थल और लोगों का बाघों के साथ पुराना रिश्ता ऐसे कारक हैं, जो यहां बाघ लाने के लिए सकारात्मक माहौल बनाते हैं। यहां पर्यटकों की कोई कमी नहीं रहेगी। होटल, गाइड, वाहन संचालक, संरक्षणवादी स्वयंसेवी संस्थाएं, छोटे दुकानदार, होमस्टे से जुड़े स्थानीय बाशिन्दे और तमाम लोग इससे लाभान्वित होंगे। कुंभलगढ़ में बाघ लाने से यह मेवाड़ के गौरव में भी बढ़ोतरी करेगा। अमूमन यहां पर्यटक दो दिन ठहरते हैं, जो तीन से चार-दिन तक का हो जाएगा। शैक्षणिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन विभाग के जानकारों के अनुसार प्री-बेस (पूर्वाधार) बाधा को दूर करने के लिए सादड़ी के नजदीक मोडिया वनखण्ड में करीब 211 हैक्टेयर का शाकाहारी वन्यप्राणियों का रिहेबिलिटेशन और रिलोकेशन केन्द्र बनाया जा चुका है। उसमें प्री-बेस बढ़ाने का कार्य प्रगतिरत है। इसमें 40 चीतल, ब्लैकबग और चौसिंगा छोड़े गए हैं। इसी प्रकार अन्य स्थानों पर ही प्री-बेस बढ़ाने का काम किए जाने की आवश्यकता है।