Girdawari Zero Issue: राजसमंद जिले के किसान इन दिनों सेटलमेंट की गड़बड़ियों के कारण भारी संकट में हैं। जी-तोड़ मेहनत से तैयार की गई फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन गिरदावरी में ‘शून्य’ दर्ज होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है।
Girdawari Zero Issue: राजसमंद जिले के किसान इन दिनों सेटलमेंट की गड़बड़ियों के कारण भारी संकट में हैं। जी-तोड़ मेहनत से तैयार की गई फसल को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन गिरदावरी में ‘शून्य’ दर्ज होने से उनकी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। किसानों का कहना है कि बंपर पैदावार के बाद वे बेहतर दाम मिलने के सपने संजोते हैं, लेकिन जब समर्थन मूल्य पर पंजीकरण ही नहीं हो पाता, तो उन्हें गहरा आघात लगता है।
खाते की नकल का रजिस्ट्रेशन करवाने पर गिरदावरी में शून्य दर्ज होना सबसे बड़ी बाधा बन गया है। समस्या के समाधान के लिए किसान पटवारी और तोल केंद्रों के लगातार चक्कर काट रहे हैं, बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। मजबूरी में उन्हें अपनी उपज बाजार में औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है। किसानों का दर्द साफ झलकता है,“किसानों का कोई धणी-धोरी नहीं।
जानकारी के अनुसार कुंवारियां तहसील में चल रहे सेटलमेंट के कारण पुराने खसरा नंबर बदलकर नए जारी कर दिए गए हैं, जबकि गिरदावरी अब भी पुराने नंबरों के आधार पर की जा रही है। इस विसंगति ने काश्तकारों के सामने गंभीर समस्या खड़ी कर दी है। यदि नए खसरा नंबरों को समय पर नहीं जोड़ा गया, तो किसान समर्थन मूल्य से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे।
कृष्णवल्लभ आचार्य, रामेश्वरलाल आचार्य, सोहनलाल कीर और प्रकाश कीर सहित कई किसानों ने बताया कि गिरदावरी में शून्य दर्ज होने के कारण वे अपनी फसल समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं। वहीं, प्यारचंद सिंगणवाल के खाता नकल में नाम सही होने के बावजूद गिरदावरी किसी अन्य व्यक्ति के नाम से दर्ज हो रही है, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। किसानों ने पटवारी, तहसीलदार और उपखंड अधिकारी से कई बार संपर्क किया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। अब उन्होंने जिला कलेक्टर से शीघ्र हस्तक्षेप कर समाधान कराने की मांग की है।
पीपली आचार्यान क्षेत्र में गिरदावरी और सर्वे-रिसर्वे के कारण किसानों को फसल बेचने में दिक्कत आ रही है। गिरदावरी पुराने नंबरों से हुई है, जबकि खातों में नए खसरा नंबर दर्ज हैं, जिससे ‘शून्य’ की समस्या सामने आ रही है। उच्च अधिकारियों को इस संबंध में अवगत करा दिया गया है।