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राजसमंद नगर परिषद चुनाव: सभापति कुर्सी की जंग में BJP-कांग्रेस का बड़ा दांव, क्रॉस वोटिंग के डर से बढ़ी हलचल

Rajsamand Politics: राजसमंद नगर परिषद में सभापति पद के लिए भाजपा की अनिता पालीवाल और कांग्रेस के मोहन कुमावत के बीच मुकाबला है। 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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Sep 17, 2026
Rajsamand Nagar Parishad Chairman Election
राजसमंद नगर परिषद सभापति पद के लिए भाजपा की अनिता पालीवाल और कांग्रेस के मोहन कुमावत (Photo-Patrika)

राजसमंद. नगर परिषद में सभापति की कुर्सी को लेकर सियासी शतरंज की बिसात बिछ चुकी है। बुधवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही राजसमंद की राजनीति में हलचल तेज हो गई। एक ओर पार्षदों की बाड़ेबंदी ने माहौल को पहले ही गर्म कर रखा है, तो दूसरी ओर सभापति पद के दावेदारों के नाम सामने आने के साथ मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। सभापति पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के कारण इस बार कई दावेदारों की नजर इस कुर्सी पर है। हालांकि नामांकन से पहले ही राजनीतिक दलों ने अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। भाजपा ने पूर्व सभापति सुरेश पालीवाल के भतीजे की बहू अनिता पालीवाल को अपना अधिकृत दावेदार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मोहनलाल कुमावत को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि राजसमंद नगरपरिषद में कुल 45 वार्ड हैं। इनमें से भाजपा के 27, कांग्रेस के 14 और चार निर्दलीय जीतकर आए हैं। भाजपा में कुमावत समाज से नौ पार्षद चुनकर आए हैं।

अनिता पालीवाल, भाजपा

  • उम्र : 35
  • शिक्षा : ग्रेजुएट
  • व्यवसाय : गृहिणी
  • किस वार्ड से चुने गए : वार्ड नंबर 6
  • राजनीति में शुरुआत : 2016
  • पार्टी में जिम्मेदारी : पार्टी की सक्रिय सदस्य
  • चुनावी अनुभव : पहला अनुभव
  • संपत्ति : 23.42 लाख
  • घोषित आपराधिक मामले : कोई नहीं
  • प्राथमिकताएं : नगर का नियोजित विकास, आधारभूत ढांचे पर काम, सीवरेज पर काम।

मोहन कुमावत, कांग्रेस

  • उम्र : 37
  • शिक्षा : साक्षर
  • व्यवसाय : मार्बल व्यवसाय
  • किस वार्ड से चुने गए : 12
  • राजनीति में शुरुआत : 2010
  • पार्टी में जिम्मेदारी : जिला कांग्रेस कमेटी सचिव
  • चुनावी अनुभव : पहला
  • संपत्ति : 7.25 लाख
  • घोषित आपराधिक मामले : कोई नहीं
  • प्राथमिकताएं : शहर का सर्वांगीण विकास।

कांग्रेस ने बदला प्रत्याशी, मोहनलाल पर जताया भरोसा

राजसमंद में कांग्रेस खेमे में भी नामांकन के दौरान कई नाम सामने आए। जानकारी के अनुसार निवर्तमान उपसभापति चुन्नीलाल पंचोली और कांग्रेस पार्षद भूरालाल कुमावत ने नामांकन पत्र दाखिल किया था। लेकिन बाद में कांग्रेस ने मोहनलाल कुमावत को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया और उन्हें मुकाबले में उतार दिया। ऐसे में अब मुकाबला भाजपा की अनिता पालीवाल और कांग्रेस के मोहनलाल कुमावत के बीच दिखाई दे रहा है। हालांकि पार्षदों की बाड़ेबंदी और समाजों के बीच चल रही लामबंदी को देखते हुए चुनावी तस्वीर अभी पूरी तरह खुली नहीं है।

कुमावत समाज की हुंकार ने बढ़ाई भाजपा की चिंता

इस पूरे सियासी घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा कुमावत समाज की मांग को लेकर है। समाज की ओर से समाज के व्यक्ति को सभापति बनाए जाने की मांग मुखर होने के बाद भाजपा खेमे में नए सियासी समीकरणों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। नामांकन की तस्वीर भले ही साफ दिखाई दे रही हो, लेकिन असली परीक्षा 21 सितंबर को होगी। यही वजह है कि भाजपा नेतृत्व किसी भी तरह के संभावित बिखराव से बचने के लिए लगातार डैमेज कंट्रोल और पार्षदों को एकजुट रखने की कवायद में जुटा है।

एसडीएम कार्यालय के बाहर भी दिखी चुनावी गर्मी

नामांकन के दौरान एसडीएम कार्यालय के आसपास भी बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रही। समर्थकों की मौजूदगी और राजनीतिक गतिविधियों के बीच पूरे इलाके में नगर परिषद के सभापति चुनाव को लेकर चर्चा का दौर चलता रहा। अब निगाहें 21 सितंबर पर टिकी हैं। उस दिन सभापति की कुर्सी किसके हिस्से आती है, यह तो मतदान के बाद ही साफ होगा, लेकिन नामांकन के साथ इतना तय हो गया है कि राजसमंद नगर परिषद का यह चुनाव महज कुर्सी का चुनाव नहीं, बल्कि पार्षदों के समर्थन और सियासी समीकरणों की भी बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।

राजसमंद. सभापति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के दौरान एसडीएम कार्यालय के बाहर मौजूद लोग। (Photo-पत्रिका)

क्रॉस वोटिंग का डर, भाजपा-कांग्रेस दोनों की बढ़ीं धड़कनें

सभापति चुनाव में अब सबसे बड़ा सवाल क्रॉस वोटिंग को लेकर है। पार्षदों की बाड़ेबंदी के बावजूद राजनीतिक दलों को भीतरघात की आशंका सता रही है। खासकर कुमावत समाज की ओर से सभापति पद को लेकर उठी मांग ने भाजपा के समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है। नामांकन के बाद दोनों ही खेमे अपने-अपने पार्षदों को साधने में जुटे हैं। किसी भी वोट का इधर-उधर होना चुनावी गणित को बदल सकता है। ऐसे में 21 सितंबर को होने वाले मतदान तक पार्षदों की निष्ठा और सियासी रणनीति पर सबकी निगाहें रहेंगी। कौन किसके साथ खड़ा होगा और मतदान के वक्त किसके पक्ष में क्रॉस वोटिंग होगी- यह सस्पेंस अब 21 सितंबर तक बरकरार रहेगा।